भारत में कहां कृत्रिम द्वीप पर एयरपोर्ट के निर्माण की योजना बनाई जा रही है? इसे लेकर अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं? कृत्रिम द्वीप पर बनाए जाने वाले एयरपोर्ट को लेकर पहली बार चर्चा कब शुरू हुई? और किन-किन देशों में ऐसे ही देश की मुख्य भूमि से अलग द्वीप पर एयरपोर्ट बनाए गए हैं? वहां क्या सुविधाएं हैं? आइये जानते हैं…

भारत में कहां कृत्रिम द्वीप पर एयरपोर्ट के निर्माण की योजना बनाई जा रही है? इसे लेकर अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं? कृत्रिम द्वीप पर बनाए जाने वाले एयरपोर्ट को लेकर पहली बार चर्चा कब शुरू हुई? और किन-किन देशों में ऐसे ही देश की मुख्य भूमि से अलग द्वीप पर एयरपोर्ट बनाए गए हैं? वहां क्या सुविधाएं हैं? आइये जानते हैं…
हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि मुंबई, जिसे दुनिया ‘मैक्सिमम सिटी’ के नाम से भी जानती है, वहीं भारत का कृत्रिम द्वीप पर बना पहला एयरपोर्ट भी होगा। इसे लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। बताया गया है कि यह एयरपोर्ट वाढवण बंदरगाह के करीब एक कृत्रिम द्वीप पर होगा, जो कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पालघर के करीब वाढवण बंदरगाह मुंबई के बिल्कुल सीमाई क्षेत्र में मौजूद है। वाढवण सीपोर्ट 76,000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है, जो कि पूरा होने के बाद दुनिया के 10 सबसे बड़े बंदरगाहों में शामिल होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2024 में इस सी पोर्ट की नींव रखी थी। बताया गया है कि यह बंदरगाह दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहला चरण 2030 तक पूरा हो जाएगा, जबकि दूसरा चरण 2039 तक पूरा होने की संभावना है।
वाढवण बंदरगाह के करीब इस एयरपोर्ट के निर्माण का प्रस्ताव पिछले साल ही देवेंद्र फडणवीस की तरफ से दिया गया था। तब फडणवीस महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने कहा था कि मुंबई को आने वाले वर्षों में तीसरे एयरपोर्ट की जरूरत होगी और दुनिया में कई जगहों पर एयरपोर्ट हासिल की गई जमीनों पर बने हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि मुंबई का तीसरा एयरपोर्ट वाढवण बंदरगाह के करीब हासिल की गई जमीन पर ही बने।
हालांकि, मुंबई में तीसरे एयरपोर्ट का विचार देवेंद्र फडणवीस से पहले राज्य की महा विकास अघाड़ी सरकार ने ही रख दिया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने तब पालघर जिले के केलवा-माहिम या दपचारी में एक घरेलू एयरपोर्ट के निर्माण पर चर्चा छेड़ी थी।
इससे भी पहले 2013 में इंजीनियरिंग सेवा प्रदाता कंपनी नीदरलैंड एयरपोर्ट कंसल्टेंट्स ने भी मुंबई के करीब कृत्रिम द्वीप बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें अलग से एक हवाई अड्डा बनाने की बात भी कही गई थी। नीदरलैंड एयरपोर्ट कंसल्टेंट्स के क्षेत्रीय प्रबंधन जोएरी ऑलमैन ने तब जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (जेएनपीटी) के उत्तर में एक टापू को बसाकर वहां एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव दिया था।
सरकार जिस कृत्रिम द्वीप पर एयरपोर्ट विकसित करने की योजना बना रही है, उसे लेकर जानना जरूरी है कि आखिर ये होते क्या हैं? दरअसल, यह समुद्र-नदी या वेटलैंड्स पर छोट-छोटे जमीन के टुकड़े होते हैं, जिन्हें आमतौर पर देश अपने क्षेत्र में होने की वजह से कब्जे में ले लेते हैं और इन्हें बसावट लायक बनाते हैं।
इसके लिए सबसे पहले इन छोटे टापुओं को भूमि पुनर्ग्रहण (लैंड रिक्लेमेशन) के जरिए निर्मित किया जाता है। इसका मतलब समुद्र, नदी या आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) को मिट्टी, रेत या कंक्रीट से भरकर नई जमीन बनाई जाती है, ताकि इसे शहरी विस्तार, पर्यटन, बुनियादी ढांचे या अन्य विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल में लाया जा सके। कृत्रिम द्वीप इसी पुनर्ग्रहण की गई जमीन पर बनाए जाते हैं।
किसी कृत्रिम द्वीप पर एयरपोर्ट बनाने की तैयारी करने वाला भारत इकलौता देश नहीं है। जहां चीन अपने डालियान जिनझू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण ऐसे ही एक कृत्रिम द्वीप पर बना रहा है, वहीं जापान 1994 में ही ऐसा द्वीप बना चुका है। इसके अलावा हॉन्गकॉन्ग का एयरपोर्ट भी इसी तरह से बना है।
दूसरी तरफ चीन भी डालियान जिनझू बे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में जुटा है। चीन के मुताबिक, एक बार इस एयरपोर्ट का निर्माण पूरा होने के बाद यह कृत्रिम द्वीप पर बना दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। इसमें चार रनवे होंगे और 9 लाख वर्ग मी. का यात्री टर्मिनल भी होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह एयरपोर्ट 2035 तक बन कर तैयार हो जाएगा। इसके बाद यहां प्रतिवर्ष 8 करोड़ यात्री आ-जा सकेंगे। साथ ही इस एयरपोर्ट पर हर साल 5.40 लाख फ्लाइट्स की आवाजाही सुनिश्चित हो जाएगी। बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट में 4.3 अरब डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।
बताया गया है कि समुद्र के किनारे स्थित डालियान शहर के पुराने एयरपोर्ट पर भीड़ क्षमता से काफी ज्यादा रही। यहां पिछले साल ही करीब 6.58 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री पहुंचे थे।
Author: planetnewsindia
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