सतहत्तर वर्षों बाद तीन विशेष योगों में सोमवार को मनाया जाएगा खिचड़ी पर्व- स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज

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सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने के संक्रमण काल को संक्रांति कहा जाता है। एक वर्ष में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं। जिसमें चार संक्रांति मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति बहुत महत्वपूर्ण मानी गई हैं। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि से निकल मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रान्ति के रूप में जाना जाता है। इसी दिन से खरमास समाप्त हो जाते हैं और सभी मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबन्ध पुनः हट जाएगा।सूर्य के मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाने को उत्तरायण और कर्क रेखा से दक्षिणी मकर रेखा की ओर जाने को दक्षिणायण कहते हैं। मकर संक्रांति से भगवान सूर्य उत्तरायण स्थिति में आते हैं।मान्यता अनुसार इस दिन महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में प्राण त्यागे थे एवं माँ गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी और भगीरथ के पूर्वज महाराज सगर के पुत्रों को मुक्ति प्रदान की थी।
मकर संक्रांति पर्व इस बार असमंजस की स्थिति में बना हुआ है चैदह जनवरी या पंद्रह जनवरी को यह पर्व मनाया जाए इस स्थिति को दूर करते हुए वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि इस बार जनवरी को रात्रि दो बजकर तैंतालीस मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा अतः इस बार मकर संक्रांति पंद्रह जनवरी को मनाई जाएगी।साथ ही सतहत्तर वर्षों के बाद इस बार मकर संक्रांति पर्व पर वरीयान योग प्रातरू दो बजकर चालीस मिनट से रात्रि ग्यारह बजकर ग्यारह मिनट तक और रवि योग प्रातः सात बजकर पंद्रह मिनट से आठ बजकर सात मिनट तक के विशेष संयोग बन रहे है,पांच वर्ष बाद सोमवार के दिन मकर संक्रांति पर सूर्य के साथ शिव का आशीर्वाद भी मिलेगा।इस दिन बुध और मंगल भी एक ही राशि धनु में विराजमान रहेंगे। स्वामी पूर्णानंदपुरी जी के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है इस दिन सूर्योदय से पूर्व पवित्र गंगा विशेषतः संगम स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए क्योंकि भगवान सूर्य की उपासना, दान, गंगा स्नान और शनिदेव की पूजा करने से सूर्य और शनि से संबंधित तमाम तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं और शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं,उसमें सूर्य के प्रवेश मात्र से शनि का प्रभाव क्षीण हो जाता है।गरीब असहाय लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ऊनी कपड़े, कम्बल, तिल और गुड़ से बने व्यंजन, घी और खिचड़ी दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है,वहीं जो लोग मासिक संक्रांति में दान नहीं कर पाए हों वह मकर संक्रांति पर बारह प्रकार के दान करके पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

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Author: Sunil Kumar

SASNI, HATHRAS

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