अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टीनेंट की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद नबील को लेकर नए खुलासे हुए हैं। नबील मदरसे में पढ़ता था। एक साल पहले देवबंद गया था। वो किसी से मेलजोल नहीं रखता था। नबील घर की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में अकेले रहता था। 12 सितंबर को दीदारगंज क्षेत्र के गांव चितारा महमूदपुर निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया गया था।
आतंकी संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टीनेंट (एक्यूआईएस) की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के आरोप में यूपी एटीएस की ओर से गिरफ्तार किए गए मोहम्मद नबील के बारे में कई जानकारियां सामने आई हैं। करीब एक वर्ष पहले वह देवबंद गया था लेकिन वह वहां किस उद्देश्य से गया था।
इसकी जांच-पड़ताल की जा रही है। दीदारगंज थाना क्षेत्र के गांव चितारा महमूदपुर का नबील लोगों से ज्यादा मेलजोल भी नहीं रखता था। घर की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में अकेले रहता था। नबील की गिरफ्तारी के बाद उसके घर पर सन्नाटा पसरा है। गांव में दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
नबील के पिता दानिश वर्तमान में सऊदी अरब में रहते हैं। नबील अपने दादा-दादी के साथ रहता था। उसकी मां अपनी दोनों बेटियों के साथ फूलपुर स्थित मायके में रहती हैं और कभी-कभार गांव आती हैं।
तीन वर्ष पहले पूरा किया था हिफ्ज का कोर्स
ग्रामीणों के अनुसार, नबील की शुरुआती धार्मिक शिक्षा फूलपुर के बाबू मदरसे में हुई, करीब तीन वर्ष पहले उसने हिफ्ज का कोर्स पूरा किया था। इसके बाद सरायमीर स्थित मदरसा मदरतुल इस्लाम में पढ़ाई कर रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार, नबील की शुरुआती धार्मिक शिक्षा फूलपुर के बाबू मदरसे में हुई, करीब तीन वर्ष पहले उसने हिफ्ज का कोर्स पूरा किया था। इसके बाद सरायमीर स्थित मदरसा मदरतुल इस्लाम में पढ़ाई कर रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार, नबील घर की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में अकेले रहता था। वह गांव के लोगों से बहुत कम मिलता-जुलता था। पड़ोसियों के मुताबिक उसकी गतिविधियों में ऐसा कुछ सामने नहीं आया था, जिससे किसी बड़े विवाद या आपराधिक गतिविधि का अंदेशा हो।
एजेंसी की जांच में नबील के परिवार के सदस्यों की सीसीटीएनएस पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी में आपराधिक पृष्ठभूमि सामने नहीं आई है। नबील की गिरफ्तारी के बाद अब एटीएस उसकी डिजिटल गतिविधियों, संपर्कों और अन्य लोगों से संबंधों की जांच कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद उसके नेटवर्क और गतिविधियों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि नबील के घर के आसपास पुलिस तैनात की गई है। एटीएस उसे लेकर जब से गई है, तब से घर पर सन्नाटा पसरा है।
आजमगढ़ में एटीएस की दूसरी बड़ी कार्रवाई
आतंकी नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों के आरोप में एटीएस ने करीब साढ़े तीन महीने के अंदर जिले में दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। 31 मई 2026 को निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर (संजरपुर) से मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी की गई थी। अब 12 सितंबर को दीदारगंज क्षेत्र के गांव चितारा महमूदपुर निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया गया। दोनों मामलों में सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आतंकी या कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का आरोप लगा है।
आतंकी नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों के आरोप में एटीएस ने करीब साढ़े तीन महीने के अंदर जिले में दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। 31 मई 2026 को निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर (संजरपुर) से मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी की गई थी। अब 12 सितंबर को दीदारगंज क्षेत्र के गांव चितारा महमूदपुर निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया गया। दोनों मामलों में सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आतंकी या कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का आरोप लगा है।
एटीएस के मुताबिक, मोहम्मद शेख पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क के संपर्क में था। सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को जोड़ने का प्रयास कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया था कि मोहम्मद शेख को दूसरे राज्य की एक राजनीतिक पार्टी की महिला नेता को धमकाने और उनकी हत्या करने का टास्क दिया गया था। आरोपी इस मिशन की तैयारी कर रहा था। उसने पिस्टल और गोली की व्यवस्था कर ली थी। उसके संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की जांच आगे जारी जारी है।
शनिवार को गिरफ्तार दीदारगंज थाना क्षेत्र के चितारा महमूदपुर निवासी मोहम्मद नबील पर भी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। एटीएस के मुताबिक, नबील प्रतिबंधित आतंकी संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहा था।
डिजिटल नेटवर्क पर निगाह
दोनों मामलों को जोड़कर देखें तो आजमगढ़ में एटीएस की निगाह अब केवल पारंपरिक आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये संचालित नेटवर्क पर भी है। 31 मई के बाद 12 सितंबर की कार्रवाई में भी एजेंसी ने युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने और आतंकी विचारधारा के प्रचार-प्रसार की बात कही है।
दोनों मामलों को जोड़कर देखें तो आजमगढ़ में एटीएस की निगाह अब केवल पारंपरिक आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये संचालित नेटवर्क पर भी है। 31 मई के बाद 12 सितंबर की कार्रवाई में भी एजेंसी ने युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने और आतंकी विचारधारा के प्रचार-प्रसार की बात कही है।
