पंजाब में रविवार को कुल 1926 मेगावाट का बिजली उत्पादन ठप रहा। इसके अलावा रणजीत सागर बांध का 150 मेगावाट की 1 नंबर यूनिट और यूबीडीसी के 45 मेगावाट की तीन यूनिट भी बंद रहीं।

पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया, जब सूबे में 1926 मेगावाट का उत्पादन ठप पड़ गया। कोयले की गंभीर कमी के कारण निजी क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल प्लांटों में बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। कुल 1400 मेगावाट की क्षमता वाले राजपुरा थर्मल प्लांट को आधी से भी कम क्षमता पर चलाया जा रहा है।
अमर उजाला ने कुछ दिन पहले ही खबर प्रकाशित करके थर्मलों में कोयले के गंभीर संकट का मुद्दा उठाते अंदेशा जताया था कि आने वाले दिनों में इससे बिजली उत्पादन प्रभावित होने से स्थिति और खराब हो सकती है। इस समय तलवंडी साबो थर्मल में मात्र पांच दिन का, राजपुरा थर्मल में छह दिन का, गोइंदवाल थर्मल में 14, लहरा मुहब्बत थर्मल में 13 दिन का और रोपड़ थर्मल में 29 दिन का कोयला शेष है।
15995 मेगावाट दर्ज की गई मांग
पंजाब में बिजली की इस बड़ी कमी के बीच रविवार को मांग 15995 मेगावाट दर्ज की गई, जो 2025 के मुकाबले 7769 मेगावाट अधिक रही। 2025 में छह सितंबर को बिजली की मांग 8226 मेगावाट और 2024 में 12670 मेगावाट दर्ज की गई थी। इस रिकॉर्ड मांग के बीच पावरकाॅम के पास अपने सभी स्रोतों से 4083 मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता रही।
इसमें प्रमुख तौर से पावरकाॅम को सरकारी क्षेत्र के थर्मल प्लांटों से 1456 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 632 मेगावाट और प्राइवेट क्षेत्र के थर्मलों से 1765 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई। दोपहर को 2 बजे जिस समय बिजली की मांग 15995 मेगावाट दर्ज की गई, उस समय पावरकाॅम ने 11566 मेगावाट के अपने शेड्यूल की तुलना में नार्दर्न ग्रिड से 11789 मेगावाट की बिजली ली। इस तरह से पावरकाॅम ने नार्दर्न ग्रिड से 223 मेगावाट बिजली ओवरड्रॉ की।