भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर जिंदाबाद’ के नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने मकान पर लगी सरकारी सील तोड़ दी और प्यारा सिंह के परिवार को मकान के अंदर ले जाकर दोबारा कब्जा दिला दिया। इसके बाद किसान कार्यकर्ता मकान के आसपास ही धरने की तरह बैठ गए।

कर्ज की वसूली को लेकर लुधियाना ग्रामीण के गांव टूसा में शुरू हुआ विवाद अब किसान जत्थेबंदी और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति तक पहुंच गया है। मंगलवार तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में फाइनेंस कंपनी ने अदालत के आदेश पर किसान प्यारा सिंह का मकान खाली करवाकर उसे सरकारी सील लगाकर बंद कर दिया था। तीन दिन बाद शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभालते हुए सरकारी सील तोड़ दी और प्यारा सिंह व उनके परिवार को उनके घर में दोबारा कब्जा दिला दिया।
शुक्रवार सुबह से ही गांव टूसा में किसान जत्थेबंदी के कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। यूनियन की ओर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि किसान परिवार को उसका आशियाना वापस दिलाया जाएगा। करीब दोपहर 12:30 बजे बड़ी संख्या में किसान कार्यकर्ता प्यारा सिंह की कोठी के बाहर पहुंच गए।
मकान के एक तरफ बंधे दुधारू पशुओं को भी कार्यकर्ताओं ने चारा और पानी दिया। किसान नेताओं ने कहा कि परिवार को घर से बाहर निकालकर पशुओं को भी बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता।
‘चाहे जो कुर्बानी देनी पड़े, परिवार को बेघर नहीं होने देंगे’
जिला प्रधान शपिंदर सिंह बग्गा और ब्लॉक प्रधान अमरीक सिंह हलवारा ने कहा कि किसान जत्थेबंदी अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल की ओर से भी प्यारा सिंह के परिवार को घर वापस दिलाने के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया गया है।
किसान नेताओं ने कहा कि चाहे उन्हें कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े, प्यारा सिंह और उसके परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अब दोबारा मकान को सील करने की कार्रवाई का विरोध किया जाएगा।
किसान यूनियन का आरोप-जिस जमीन पर कर्ज, वह कोठी से अलग
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्यारा सिंह परिवार ने जिस प्लाट/जमीन पर कर्ज लिया था, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में उसका नंबर अलग है और उस जमीन पर पशुओं का तबेला है। उनके अनुसार जिस कोठी पर कार्रवाई की गई, वह पुश्तैनी जमीन पर बनी हुई है और उसका मुस्तरका यानी साझा खाता है।