वर्ष 2023-24 में पंजाब में 9,195 सैंपल लिए गए थे। इनमें 929 फेल और 111 असुरक्षित पाए गए। इस दौरान 1,204 सिविल मामलों में 1.98 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया जबकि 102 आपराधिक मामले दर्ज हुए और इनमें 11.45 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।

पंजाब में बच्चों के खाने, हेल्थ ड्रिंक्स और फूड सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वर्ष 2024-25 में लिए गए 10,804 सैंपलों में 748 फेल पाए गए। यानी रोजाना दो से अधिक सैंपल जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे।
लोकसभा में पेश हुई थी रिपोर्ट
यह जानकारी हाल ही में लोकसभा में पेश संसद की उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में पंजाब में इन उत्पादों से जुड़े 333 सिविल मामले सामने आए। इनमें 20.06 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। आठ आपराधिक मामले भी दर्ज हुए जिनमें 3.50 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।
वर्ष 2023-24 में पंजाब में 9,195 सैंपल लिए गए थे। इनमें 929 फेल और 111 असुरक्षित पाए गए। इस दौरान 1,204 सिविल मामलों में 1.98 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया जबकि 102 आपराधिक मामले दर्ज हुए और इनमें 11.45 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। दोनों वर्षों में कुल 1,677 सैंपल फेल पाए गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पैकेट पर दी गई जानकारी अभिभावकों के लिए उत्पाद चुनने का प्रमुख आधार होती है। ऐसे में गलत या भ्रामक जानकारी से उपभोक्ता सही फैसला नहीं ले पाते। समिति ने चीनी की मात्रा को लेकर विशेष सावधानी बरतने पर जोर दिया है। बच्चों के खानपान में अत्यधिक चीनी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
हरियाणा में 500 तो चंडीगढ़ में 65 सैंपल फेल
हरियाणा में 2024-25 के दौरान बच्चों के खाने, हेल्थ ड्रिंक्स और फूड सप्लीमेंट्स के 4,763 सैंपल लिए गए। इनमें 500 फेल और 89 असुरक्षित मिले। चंडीगढ़ में 1,906 सैंपलों की जांच हुई जिनमें 65 फेल और 11 असुरक्षित पाए गए। हिमाचल प्रदेश में 4,353 सैंपलों में 293 फेल और 36 असुरक्षित मिले। जम्मू-कश्मीर में 23,037 खाद्य और पेय पदार्थों की जांच कराई गई जिनमें 651 फेल और 24 असुरक्षित पाए गए।
पैकेट पर चीनी और पोषण की जानकारी साफ लिखने की सिफारिश
समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि पैकेट में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा और पोषण संबंधी जानकारी साफ और आसानी से दिखाई दे। शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा की तय सीमा तय करने की संभावना पर भी विचार किया जाए। सभी पैकेट वाले खाद्य पदार्थों पर चीनी और पोषण संबंधी जानकारी एक समान तरीके से देना अनिवार्य किया जाए ताकि उपभोक्ता अलग-अलग उत्पादों की आसानी से तुलना कर सकें।



