ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि जब तक बेअदबी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा सत्र में इस कानून पर किसी प्रकार की चर्चा या विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे पर असंतोष जताया है।
जत्थेदार ने कहा कि “स्वरूप” की जगह “बीड़” शब्द जोड़ने और “कस्टोडियन” शब्द हटाने की मांग पर सरकार ने यह कहते हुए बदलाव नहीं किया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। सरकार ने “कस्टोडियन” शब्द की केवल विस्तृत व्याख्या जोड़ दी, लेकिन उसे मसौदे से हटाया नहीं गया। इसी तरह “स्वरूप” शब्द भी पहले की तरह बरकरार रखा गया।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दी गई लंबी व्याख्या की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें कानून में शामिल किया जाना चाहिए था। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि जब तक बेअदबी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा सत्र में इस कानून पर किसी प्रकार की चर्चा या विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
प्रेस वार्ता में जत्थेदार ने दोहराया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा और सम्मान से जुड़े विषय पर किसी भी कानून को अंतिम रूप देने से पहले पंथ की भावनाओं, धार्मिक परंपराओं और अकाल तख्त साहिब के सुझावों का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उनका कहना था कि यदि सहमति से तय किए गए बिंदुओं को कानून में शामिल नहीं किया जाता, तो इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा।