अब देश में उपभोग का केंद्र केवल छह बड़े महानगर नहीं रह गए हैं। अमृतसर जैसे उभरते शहर भी तेजी से आर्थिक गतिविधियों और उपभोग के नए केंद्र बन रहे हैं। छोटे और मध्यम शहरों में आय, व्यापार और सेवा क्षेत्र के विस्तार का सीधा असर लोगों की खर्च करने की क्षमता पर दिखाई दे रहा है।
समृद्ध विरासत और कारोबार के लिए पहचान रखने वाला अमृतसर अब उपभोक्ता खर्च के मामले में भी देश के अग्रणी शहरों में शामिल हो गया है।
चेन्नई-कोलकाता से आगे अमृतसर
रिपोर्ट के अनुसार अमृतसर में एक परिवार का औसत वार्षिक उपभोग व्यय 15 लाख रुपये है। वहीं, 2025-26 में शहर की औसत पारिवारिक आय 19 लाख रुपये दर्ज की गई है। आय के मामले में अमृतसर चेन्नई, जयपुर, लखनऊ और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से भी आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक सीमावर्ती शहर होने के बावजूद अमृतसर में मजबूत खरीद क्षमता और बढ़ते उपभोक्ता वर्ग ने इसे देश के उभरते आर्थिक केंद्रों में शामिल कर दिया है।
बंगलुरु के बाद आय में दूसरे स्थान पर चंडीगढ़
औसत पारिवारिक आय के मामले में बंगलुरु 29 लाख रुपये के साथ पहले और चंडीगढ़ 28 लाख रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है। वडोदरा और दिल्ली में यह औसत 26 लाख रुपये है। इसके बाद मुंबई और पुणे का स्थान आता है। चेन्नई, अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहर भी इस मामले में चंडीगढ़ से पीछे हैं।
प्रति परिवार उपभोग व्यय के मामले में चंडीगढ़ देश में पहले स्थान पर है। यहां एक परिवार का औसत वार्षिक खर्च 19 लाख रुपये है। तिरुवनंतपुरम और वडोदरा 17-17 लाख रुपये के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि तिरुप्पुर और सूरत भी शीर्ष पांच शहरों में शामिल हैं। हाउसहोल्ड सर्वे पर आधारित यह रिपोर्ट देश के शीर्ष 100 शहरों के परिवारों की आय, खर्च, बचत, उधारी और संपत्ति निर्माण का विश्लेषण करती है।


