Jaspal Rana: मशहूर भारतीय निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का निधन, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल में जीते हैं पदक

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मशहूर भारतीय निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं। राणा को 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है।

Jaspal Rana के निधन से शोक में डूबा भारतीय खेल जगत, एशियन गेम्‍स में दिलाया  था देश को गोल्‍ड - renowned indian shooting coach and former asian games  gold medallist jaspal rana

मशहूर भारतीय निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं। राणा को 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका निधन हृदय की बीमारी के इलाज के दौरान हुआ है। राणा के परिवार में उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, बेटा युवराज, पिता नारायण सिंह राणा और उनकी बहन सुषमा सिंह और छोटा भाई सुभाष राणा शामिल हैं।

फ्लाइट में ही बिगड़ गई थी तबीयत
राणा म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप के बाद जर्मनी से लौटे थे। वह फिलहाल भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्य कर रहे थे। भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और दो स्वर्ण तक इतने ही रजत पदक जीते थे। भारतीय राइल संघ (एनआरएआई) के एक सूत्र ने कहा, हां, जसपाल को फ्लाइट में कुछ दिक्कतें हो रही थी और दिल्ली में उतरने के बाद वह सीधे अस्पताल गए। वहां, उनका टेस्ट किया गया और स्टेंट डाला गया।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित
एनआरएआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। राणा को कड़ी ट्रेनिंग रूटीन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। एनआरएआई ने फरवरी 2025 में राणा को 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया।

राणा ने भारत में निशानेबाजी को बढ़ाया आगे
राणा का निधन भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीते और देश के सबसे सफल निशानेबाजों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई। राणा ने कई वर्षों तक शानदार ढंग से भारत का प्रतिनिधित्व किया और निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई, खासकर उस समय जब देश में यह खेल विकसित हो रहा था। शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

12 साल की उम्र में जीता था पहला स्वर्ण
अपने मुखर स्वभाव, बेबाक टिप्पणी करने और खेल के प्रति जुनून के कारण भारतीय निशानेबाजी जगत में विद्रोही माने जाने वाले जसपाल राणा में असाधारण प्रतिभा थी और उन्होंने महज 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। 1994 के राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतना उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बड़ी सफलता थी। दरअसल एशियाई खेलों का उनका स्वर्ण पदक राजा रणधीर सिंह के 1978 में सोने का तमगा जीतने के 16 साल बाद भारत का पहला स्वर्ण पदक था।

रणधीर सिंह का हाल ही में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझने के बाद निधन हो गया था। एक निशानेबाज के रूप में राणा के करियर का सबसे बड़ा क्षण 2006 के दोहा एशियाई खेलों में आया जब उन्होंने तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता, जिसमें उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करना भी शामिल था। एक उत्कृष्ट निशानेबाज के रूप में शानदार करियर के बाद राणा जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच और हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में अपनी भूमिकाओं से भारतीय निशानेबाजी में बदलाव लेकर आए।

राष्ट्रमंडल खेल में जीते कुल 15 पदक
राणा ने राष्ट्रमंडल खेलों में चार बार भाग लिया और कुल 15 पदक हासिल किया जिसमें नौ स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। वह राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी हैं। कोच के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलता पेरिस में 2024 में खेले गए ओलंपिक खेलों में मनु भाकर को दो कांस्य पदक जीतने में मदद करना था। वह 2012 से जूनियर पिस्टल कोच थे और उनकी देखरेख में ही सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे निशानेबाज उभर कर सामने आए थे। उन्होंने जूनियर स्तर पर अभूतपूर्व कार्य करके कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार किए।

पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जसपाला राणा के निधन पर गहरा शोक जताया। मोदी ने एक्स पर लिखा, जसपाल राणा जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का मान बढ़ाया। एक मेंटर के तौर पर भी उनका योगदान बहुत अहम रहा। उन्होंने पूरी लगन से युवा खिलाड़ियों को तराशा और उनका मार्गदर्शन किया। बेहतरीन प्रदर्शन, अनुशासन और खेल जगत की सेवा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के कारण उन्हें बहुत सम्मान मिला। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और पूरे खेल जगत के साथ हैं। ओम शांति।
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Author: ILMA NEWSINDIA

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