यूपी में सीट बंटवारे पर भाजपा इसी माह विमर्श शुरू करेगी। भाजपा नेतृत्व से संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर ने मुलाकात की है। इसके अलावा नई टीम पर यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने केंद्रीय नेतृत्व के साथ अंतिम मंथन किया है।

उत्तर प्रदेश में समय से पूर्व चुनाव की आहट के बीच भाजपा जल्द ही सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे पर विमर्श शुरू करेगी। पार्टी नेतृत्व इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार और केंद्रीय संगठन की नई टीम गठित होने का इंतजार कर रही है।
गौरतलब है कि इस संदर्भ में राज्य में भाजपा की दो सहयोगी दलों सुभासपा और निषाद पार्टी के मुखिया ने बृहस्पतिवार को भाजपा नेतृत्व से मुलाकात कर राज्य की ताजा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा के साथ सीट बंटवारे पर जल्द मंथन शुरू करने का अनुरोध किया।
मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर बुधवार को भारत मंडपम में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लेने दिल्ली आए सुभासपा के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की।
पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं को इसी महीने के अंत तक विमर्श शुरू करने का आश्वासन दिया। भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी भी चाहती है कि विधानसभा चुनाव के लिए जल्द तैयारी शुरू की जाए।
सूत्रों के मुताबिक छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में से गोरखपुर और वाराणसी के मामले में पेच फंसा था। इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है। अब चौधरी इसी हफ्ते अपनी नई टीम की घोषणा कर देंगे। नई टीम में सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष, विभिन्न मोर्चाओं में नए चेहरे को मौका मिलेगा। इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी में भी 50 फीसदी नए चेहरे होंगे।
विधानसभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व की कोशिश सहयोगी दलों के साथ चुनाव प्रचार और चुनावी रणनीति का साझा रोडमैप तैयार करने की है। इस क्रम में नेतृत्व की योजना जुलाई महीने तक सीट बंटवारे के साथ चुनाव प्रचार की रणनीति को अंतिम रूप देने की है। चूंकि वर्तमान में 5 जून से 21 जून तक पार्टी सेवा पखवाड़ा चला रही है और इसी महीने मंत्रिमंडल विस्तार के साथ केंद्रीय संगठन की नई टीम तैयार होनी है। ऐसे में सभी रणनीतियों पर अगले महीने विचार के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने अगले विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी की ओर से प्रदेश कार्यकारिणी को भंग किए जाने के पीछे केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की व्यापक योजना मानी जा रही है।