साल 2024 का यह मामला है जिसमें मामूली कहासुनी में दोषी अशोक ने महाबीर को पीटकर मौत के घाट उतार दिया था।

गांव चंदावास के महाबीर हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया की अदालत ने दोषी अशोक, निवासी पश्चिम पांच गजिया, जिला बरायेपुर (पश्चिम बंगाल) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह हत्या मामूली कहासुनी के बाद हुई मारपीट के कारण हुई थी जिसमें गंभीर रूप से घायल महाबीर की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
शिकायतकर्ता मनेश निवासी चंदावास ने थाना जूई कलां पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 13 अगस्त 2024 को वह अपने घर पर मौजूद था। रात करीब 11 बजे गांव के एक व्यक्ति ने उसे सूचना दी कि उसके पिता महाबीर गांव के वाटर वर्क्स के पास घायल अवस्था में पड़े हैं और उन्हें काफी चोटें लगी हैं। सूचना मिलने पर वह अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ गांव के वाटर वर्क्स पर पहुंचा। वहां उसने देखा कि उसके पिता महाबीर की आंख और मुंह पर गंभीर चोटों के निशान थे।
पूछताछ करने पर घायल महाबीर ने बताया कि किसी बात को लेकर उसकी अशोक के साथ कहासुनी हो गई थी जिसके बाद अशोक ने उसके साथ मारपीट की और मौके से फरार हो गया। इसके बाद परिजन महाबीर को उपचार के लिए हिसार के एक निजी अस्पताल में ले गए जहां उपचार के दौरान 20 अगस्त 2024 को उनकी मौत हो गई। शिकायत के आधार पर थाना जूई कलां में हत्या की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी अशोक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
ट्रायल के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अशोक को दोषी ठहराया। अदालत ने दोषी अशोक को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


