बंगाल वाली रणनीति से पंजाब फतह?: नशा और राज्य की सुरक्षा को मुद्दा बनाएगी भाजपा, जून में ही मिल जाएंगे प्रभारी

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पश्चिम बंगाल और असम में मिली राजनीतिक सफलता के बाद अब भाजपा की नजरें पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव पर हैं। माना जा रहा है कि इस राज्य को फतह करने के लिए भाजपा बंगाल की रणनीति अपनाएगी। नशा और राज्य की सुरक्षा को पार्टी आगामी चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाएगी। तैयारियों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जून महीने में ही विधानसभा प्रभारियों की नियुक्ति हो जाएगी। पढ़िए ये रिपोर्ट

BJP to Conquer Punjab with Bengal Strategy Make Drugs and State Security Key Issues assembly In-Charge in June

पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने की योजना साकार होने से उत्साहित भाजपा अब पंजाब को भगवामय करने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी। इसके लिए पार्टी पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ही जून महीने में ही सभी विधानसभा सीटों और तीन क्षेत्रों माझा, दोआबा और मालवा के लिए प्रभारियों की नियुक्ति करेगी। बंगाल की तरह ही गृह मंत्री अमित शाह इसी महीने से राज्य की सियासत की नब्ज टटोलकर संगठन को सक्रिय करने की मुहिम में जुटेंगे।

बंगाल की तरह ही पंजाब भी सीमावर्ती राज्य है। पार्टी सूत्रों का कहना है बंगाल में बांग्लादेश से घुसपैठ राष्टï्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था, जबकि पंजाब में पाकिस्तान से हो रही ड्रग्स की आपूर्ति बड़ा खतरा बनती जा रही है। बंगाल में इस खतरे को मुद्दा बनाने केलिए पार्टी ने परिवर्तन यात्राओं का सहारा लिया था। चूंकि ड्रग्स रैकेट को खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी इस मोर्चे पर बुरी तरह विफल रही है, ऐसे में पार्टी पंजाब को नशामुक्त करने का अभियान छेड़ते हुए पूरे राज्य में नशे के खिलाफ यात्रा निकालेगी।

शून्य सीट के बावजूद उम्मीद
बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह, रवनीत सिंह बिट्टू को पार्टी में शामिल करने के बावजूद पार्टी का खाता नहीं खुला। हालांकि इस चुनाव में पार्टी को सर्वाधिक 18.56 फीसदी वोट मिले। यह सर्वाधिक सात सीटें जीतने वाली कांग्रेस और तीन सीटें जीतने वाली आप से 8 फीसदी कम था। पार्टी सूत्र के मुताबिक चूंकि इस बार के चुनाव में उसकेपास सिद्धू परिवार, हरभजन सिंह के रूप में मजबूत सिख चेहरा होगा, जिससे जमीनी स्तर पर मजबूत प्रबंधन के जरिए स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है।

शिअद से गठबंधन पर संशय
पार्टी हालांकि सार्वजनिक तौर पर अपने सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन से इंकार कर रही है, मगर हकीकत में पार्टी की योजना अपनी शर्तो पर इसे अंजाम देने की है। राज्य इकाई के वरिष्ठï नेता के मुताबिक बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत शिअद से ज्यादा रहा है। ऐसे में शिअद अगर कम से कम बराबर की सीट पर लडऩे के लिए राजी हो, तभी बातचीत के दरवाजे खुल सकते हैं।

बड़े स्तर पर कार्रवाई
राज्य में मान सरकार के कई मंत्री भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जूझ रहे हैं। इनमें से कुछ मंत्रियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की है। आरोपों का सामना कर रहे अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी जल्द बड़े स्तर पर कार्रवाई होगी। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है राज्यसभा के सात सदस्यों के आप छोडऩे और सोमवार को सीएम मान के भाई के भाजपा में शामिल होने के बाद आप के बिखडऩे की धारणा भी मजबूत हुई है।

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Author: Farheen

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