स्पीकर ने रखा अकाल तख्त पर पक्ष: ‘कानून कौम को मंजूर नहीं’, सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम; ये हैं आपत्तियां

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स्पीकर ने अकाल तख्त पर अपना पक्ष रखा है। जत्थेदार ने कहा कि कानून कौम को मंजूर नहीं है। अकाल तख्त ने सरकार को 15 दिन के भीतर विवादित प्रावधान हटाने का अल्टीमेटम दिया है।

Akal Takht Issues 15-Day Ultimatum to Punjab Govt Over Controversial Amendment Act

जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026 को लेकर पंजाब सरकार और सिख धार्मिक नेतृत्व के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां शुक्रवार को श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे, जहां उन्होंने सरकार का पक्ष रखा।

हालांकि, जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने इसे साफ इन्कार करते हुए कहा कि पंथ की सहमति के बिना बनाया गया यह कानून कौम को मंजूर नहीं होगा। अकाल तख्त ने सरकार को 15 दिन के भीतर विवादित प्रावधान हटाने का अल्टीमेटम दे दिया है।

करीब एक घंटे तक चली बैठक में कानून की धाराओं और धार्मिक आपत्तियों पर चर्चा हुई। संधवां ने कहा कि सरकार ने यह कानून मर्यादा और संगत की भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाया है। उन्होंने बताया कि कानून से पहले अखबारों में विज्ञापन जारी कर सुझाव मांगे गए थे। उनका दावा है कि नए कानून से बेअदबी की घटनाओं पर सख्त रोक लगेगी और दोषियों को जमानत नहीं मिल पाएगी।

वहीं, जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने सरकार के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, यह कानून जल्दबाजी और एकतरफा तरीके से बनाया गया। 11 अप्रैल की रात मसौदा तैयार हुआ और केवल दो दिन में 13 अप्रैल को विधानसभा से पारित करवा दिया गया। अब तक कानून का अधिकृत पंजाबी ड्राफ्ट भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जत्थेदार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर विवादित प्रावधान नहीं हटाए गए तो अकाल तख्त साहिब पर पांच सिंह साहिबानों की बैठक बुलाकर सख्त फैसला लिया जाएगा।
अकाल तख्त साहिब की ये हैं आपत्तियां
जल्दबाजी और दबाव में बना कानून
11 अप्रैल को मसौदा बना और 13 अप्रैल (सिर्फ दो दिन में) विधानसभा से पारित करवा दिया गया, जबकि पंथ की राय लेने की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

अधिकृत पंजाबी ड्राफ्ट सार्वजनिक न होना

अब तक कानून का पंजाबी में आधिकारिक ड्राफ्ट जारी नहीं किया गया है, जिससे आम संगत और धार्मिक विद्वान इसे समझ नहीं पा रहे हैं।

धार्मिक मामलों में सरकार का हस्तक्षेप

कानून के कई प्रावधान ऐसे हैं, जिनसे गुरुद्वारा प्रबंधकों, ग्रंथियों और पाठी सिंहों को अपराधी की तरह खड़ा किया जा सकता है। यह सिख धार्मिक मामलों में सरकार का सीधा हस्तक्षेप है।

बीड़ शब्द हटाने पर आपत्ति

पारंपरिक सिख शब्दावली से ”बीड़” शब्द को हटाना अस्वीकार्य है। सरकार को सिख शब्दावली तय करने का कोई अधिकार नहीं है।

गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का सार्वजनिक रिकॉर्ड करने पर आपत्ति

सभी पावन स्वरूपों का रिकॉर्ड सार्वजनिक वेबसाइट पर डालने का प्रस्ताव धार्मिक दृष्टि से असंवेदनशील और आपत्तिजनक है।

एकतरफा तरीका, पंथ की सहमति का अभाव

इस कानून के निर्माण में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या अकाल तख्त जैसे धार्मिक निकायों से औपचारिक सहमति या विचार-विमर्श नहीं किया गया।
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Author: Farheen

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