स्पीकर ने अकाल तख्त पर अपना पक्ष रखा है। जत्थेदार ने कहा कि कानून कौम को मंजूर नहीं है। अकाल तख्त ने सरकार को 15 दिन के भीतर विवादित प्रावधान हटाने का अल्टीमेटम दिया है।

जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026 को लेकर पंजाब सरकार और सिख धार्मिक नेतृत्व के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां शुक्रवार को श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे, जहां उन्होंने सरकार का पक्ष रखा।
हालांकि, जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने इसे साफ इन्कार करते हुए कहा कि पंथ की सहमति के बिना बनाया गया यह कानून कौम को मंजूर नहीं होगा। अकाल तख्त ने सरकार को 15 दिन के भीतर विवादित प्रावधान हटाने का अल्टीमेटम दे दिया है।
वहीं, जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने सरकार के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, यह कानून जल्दबाजी और एकतरफा तरीके से बनाया गया। 11 अप्रैल की रात मसौदा तैयार हुआ और केवल दो दिन में 13 अप्रैल को विधानसभा से पारित करवा दिया गया। अब तक कानून का अधिकृत पंजाबी ड्राफ्ट भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जल्दबाजी और दबाव में बना कानून
11 अप्रैल को मसौदा बना और 13 अप्रैल (सिर्फ दो दिन में) विधानसभा से पारित करवा दिया गया, जबकि पंथ की राय लेने की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
अधिकृत पंजाबी ड्राफ्ट सार्वजनिक न होना
धार्मिक मामलों में सरकार का हस्तक्षेप
बीड़ शब्द हटाने पर आपत्ति
गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का सार्वजनिक रिकॉर्ड करने पर आपत्ति
एकतरफा तरीका, पंथ की सहमति का अभाव