
आईसीएससी ने कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजे जारी कर दिए हैं। 10वीं में छवि और 12वीं में रिया ने टॉप किया। विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाते हुए सेल्फ स्टडी को आधार बनाया। कोई रातभर जागकर पढ़ा तो किसी ने सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई की। अमर उजाला से बातचीत में विद्यार्थियों ने सफलता और सालभर के संघर्ष को साझा किया। आदर्श स्कूल के इन विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने घंटे तय करके पढ़ाई नहीं की, बल्कि योजना बनाते हुए विषयों को समझकर पढ़ाई की। उनका कहना है कि कोचिंग की जरूरत तब पड़ती है, जब हमारी एकाग्रता न हो। इसलिए विषयों को समझते हुए पढ़ाई करनी चाहिए।
10 साल पुराने प्रश्नपत्र हल करके किया टॉप, चाचा की शादी भी छोड़ी
आरकेपुरम निवासी छवि ने 10वीं की पढ़ाई बिना कोचिंग अपने दम पर करके जिले में नाम चमकाया है। उन्होंने बताया कि जो स्कूल में पढ़ा, वही घर आकर रिवाइज किया। इसके अलावा पिछले 10 वर्षों के प्रश्नपत्र हल करके उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया। वे पढ़ने के घंटे तय न करके विषयवार पढ़ाई रोजाना की टू-डू लिस्ट बनाकर पढ़ाई करती थीं। छात्रा ने अपनी पढ़ाई के लिए चाचा की शादी में शामिल होना भी छोड़ दिया था। रोडवेज के चालक पिता प्रदीप कांबोज और शिक्षक मां सरिता देवी की बेटी का न्यूरोलॉजिस्ट बनने का सपना है। इसके लिए अभी से 11वीं में मेडिकल संकाय लेते हुए तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि वे सफलता प्राप्त करके अपने परिवार में पहली डॉक्टर बनेंगी। छात्रा के बायोलॉजी, एसएसटी में 100, हिंदी और फिजिकल एजुकेशन में 99 व अंग्रेजी में 97 अंक हैं।
आरकेपुरम निवासी छवि ने 10वीं की पढ़ाई बिना कोचिंग अपने दम पर करके जिले में नाम चमकाया है। उन्होंने बताया कि जो स्कूल में पढ़ा, वही घर आकर रिवाइज किया। इसके अलावा पिछले 10 वर्षों के प्रश्नपत्र हल करके उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया। वे पढ़ने के घंटे तय न करके विषयवार पढ़ाई रोजाना की टू-डू लिस्ट बनाकर पढ़ाई करती थीं। छात्रा ने अपनी पढ़ाई के लिए चाचा की शादी में शामिल होना भी छोड़ दिया था। रोडवेज के चालक पिता प्रदीप कांबोज और शिक्षक मां सरिता देवी की बेटी का न्यूरोलॉजिस्ट बनने का सपना है। इसके लिए अभी से 11वीं में मेडिकल संकाय लेते हुए तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि वे सफलता प्राप्त करके अपने परिवार में पहली डॉक्टर बनेंगी। छात्रा के बायोलॉजी, एसएसटी में 100, हिंदी और फिजिकल एजुकेशन में 99 व अंग्रेजी में 97 अंक हैं।

डे-प्लान के तहत पढ़ाई पूरी करके ली नींद, अब डॉक्टर बनने का सपना
मॉडल टाउन निवासी भारती ने योजनाबद्ध तरीके से 10वीं की पढ़ाई करते हुए सफलता पाई है। पिता शमशेर और पुलिस में सिपाही मां किरण की इस बेटी का डॉक्टर बनने का सपना है। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। छात्रा के हिंदी, इतिहास, सिविक और भूगोल में 100 हैं। अपनी तैयारी पर चर्चा करते हुए भारती ने बताया कि उन्होंने सेल्फ स्टडी पर ही भरोसा किया। वे रोजाना ही सुबह ही दिन की पढ़ाई का प्लान बना लेती थी और रात तक उसे पूरा करके ही नींद लेती थी। उनका कहना है कि यदि योजना अच्छी हो तो ट्यूशन की जरूरत नहीं रहती। विषय को समझना जरूरी है, रटने से सफलता नहीं मिलती। उनका कहना है कि डॉक्टर बनने के बाद लोगों की दुआएं वह कमाना चाहती है।
मॉडल टाउन निवासी भारती ने योजनाबद्ध तरीके से 10वीं की पढ़ाई करते हुए सफलता पाई है। पिता शमशेर और पुलिस में सिपाही मां किरण की इस बेटी का डॉक्टर बनने का सपना है। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। छात्रा के हिंदी, इतिहास, सिविक और भूगोल में 100 हैं। अपनी तैयारी पर चर्चा करते हुए भारती ने बताया कि उन्होंने सेल्फ स्टडी पर ही भरोसा किया। वे रोजाना ही सुबह ही दिन की पढ़ाई का प्लान बना लेती थी और रात तक उसे पूरा करके ही नींद लेती थी। उनका कहना है कि यदि योजना अच्छी हो तो ट्यूशन की जरूरत नहीं रहती। विषय को समझना जरूरी है, रटने से सफलता नहीं मिलती। उनका कहना है कि डॉक्टर बनने के बाद लोगों की दुआएं वह कमाना चाहती है।

आज के काम को आज ही निपटाया, बाधाओं को दूर कर किया टॉप
शक्तिपुरम निवासी रिया कांबोज ने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए रोज के पाठ्यक्रम को रिवाइज करके जिले में सफलता का परचम लहराया है। उनका कहना है कि एकाग्रता से तैयारी की जाए तो सफलता जरूर मिलती है, आज का काम कभी भी कल पर नहीं छोड़ना चाहिए। यह मंत्र उन्होंने अपनाया। घर के निर्माण कार्य और पारिवारिक कार्यक्रमों से उनकी पढ़ाई कुछ समय के लिए बाधित हुई थी, जिसे उन्होंने अतिरिक्त समय देकर पूरा किया। संयुक्त परिवार में किसान पिता सुरेंद्र कुमार और गृहिणी मां रजनी के अलावा अन्य सदस्यों ने भी उन्हें पढ़ाई में प्रेरित किया। उनके फिजिकल एजूकेशन में 99, बिजनेस स्टडी में 96 अंक हैं। सीए बनने का लक्ष्य तय करते हुए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि रोजाना तीन से चार घंटे पढ़ाना ही पर्याप्त है, बशर्ते विषय को समझकर पढ़ाई हो।
शक्तिपुरम निवासी रिया कांबोज ने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए रोज के पाठ्यक्रम को रिवाइज करके जिले में सफलता का परचम लहराया है। उनका कहना है कि एकाग्रता से तैयारी की जाए तो सफलता जरूर मिलती है, आज का काम कभी भी कल पर नहीं छोड़ना चाहिए। यह मंत्र उन्होंने अपनाया। घर के निर्माण कार्य और पारिवारिक कार्यक्रमों से उनकी पढ़ाई कुछ समय के लिए बाधित हुई थी, जिसे उन्होंने अतिरिक्त समय देकर पूरा किया। संयुक्त परिवार में किसान पिता सुरेंद्र कुमार और गृहिणी मां रजनी के अलावा अन्य सदस्यों ने भी उन्हें पढ़ाई में प्रेरित किया। उनके फिजिकल एजूकेशन में 99, बिजनेस स्टडी में 96 अंक हैं। सीए बनने का लक्ष्य तय करते हुए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि रोजाना तीन से चार घंटे पढ़ाना ही पर्याप्त है, बशर्ते विषय को समझकर पढ़ाई हो।

मुश्किल सवालों को कम समय में किया हल.. टाइमटेबल बनाकर रात में की पढ़ाई
शक्तिपुरम निवासी चेतन्य ने 12वीं की परीक्षा की तैयारी मुश्किल सवालों को पहले हल करते हुए की। यही मंत्री उनकी सफलता का आधार भी बना। उन्होंने बताया कि सेल्फ स्टडी में उनकी स्कूल शिक्षक मददगार बनीं। वे रोजाना मुश्किल सवाल या पुराने पेपर देते थे, जिन्हें उन्हें हल करने के लिए समय भी कम दिया जाता था। पिता मंगलेश्वर और मां संगीता के बेटे का डॉक्टर बनने का सपना है, नीट की तैयारी वह काफी समय से कर रहे हैं। उनके मामा भी डॉक्टर हैं। उनके फिजिकल एजुकेशन में 98 और कैमिस्ट्री में 96 अंक हैं। उनका कहना है कि तैयारी में बहन ने टाइमटेबल बनाकर पढ़ने में मदद की। वे रात में ज्यादा पढ़ाई करत थे और हर दिन अलग-अलग विषय पढ़कर पाठ्यक्रम पूरा करते थे।
शक्तिपुरम निवासी चेतन्य ने 12वीं की परीक्षा की तैयारी मुश्किल सवालों को पहले हल करते हुए की। यही मंत्री उनकी सफलता का आधार भी बना। उन्होंने बताया कि सेल्फ स्टडी में उनकी स्कूल शिक्षक मददगार बनीं। वे रोजाना मुश्किल सवाल या पुराने पेपर देते थे, जिन्हें उन्हें हल करने के लिए समय भी कम दिया जाता था। पिता मंगलेश्वर और मां संगीता के बेटे का डॉक्टर बनने का सपना है, नीट की तैयारी वह काफी समय से कर रहे हैं। उनके मामा भी डॉक्टर हैं। उनके फिजिकल एजुकेशन में 98 और कैमिस्ट्री में 96 अंक हैं। उनका कहना है कि तैयारी में बहन ने टाइमटेबल बनाकर पढ़ने में मदद की। वे रात में ज्यादा पढ़ाई करत थे और हर दिन अलग-अलग विषय पढ़कर पाठ्यक्रम पूरा करते थे।