जयपुर में DGFT–ICEGATE से जुड़ा 400 करोड़ का साइबर फ्रॉड उजागर। फर्जी डिजिटल सिग्नेचर के जरिए निर्यातकों के खाते हैक कर स्क्रिप्स ट्रांसफर की गईं। 5 आरोपी गिरफ्तार, इंटरनेशनल नेटवर्क और सुरक्षा खामियां सामने आईं।

एक तरफ देश में हो रहे पांच राज्यों के चुनावों में बीजेपी अवैध घुसपैठियों का मुद्दा जोरशोर से उठा रही है। वहीं दूसरी तरफ देश के आर्थिक डिजिटल सिक्योरिटी सिस्टम में अब तक की सबसे बड़ी सायबर घुसपैठ का मामला जयपुर से सामने आया है। राजधानी जयपुर में देश के निर्यात तंत्र से जुड़े एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसमें ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप के जरिए करीब 400 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है।
मामले में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। जयपुर से उजागर हुआ DGFT–ICEGATE स्क्रिप साइबर फ्रॉड अब एक बड़े राष्ट्रीय खतरे के रूप में सामने आया है। सैंकड़ो करोड़ रुपए की इस ठगी ने भारत के डिजिटल निर्यात सिस्टम और साइबर सुरक्षा ढांचे की गंभीर कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
यह मामला सीधे विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और ICEGATE जैसे अहम सरकारी प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा है, जिन पर देशभर के निर्यातक निर्भर करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर ये प्लेटफॉर्म ही सुरक्षित नहीं हैं, तो व्यापारियों के डेटा और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं की सुरक्षा कितनी मजबूत है।
जांच में सामने आया है कि साइबर गिरोह ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस फ्रॉड को अंजाम दिया। फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) हासिल किए गए। इसके बाद आरोपियों ने DGFT पोर्टल पर लॉगिन कर असली निर्यातकों की प्रोफाइल डिटेल्स-जैसे ईमेल और मोबाइल नंबर बदल दिए। नकली डिजिटल सिग्नेचर के जरिए खातों पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया गया और ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स को फर्जी (म्यूल) खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में इन्हें बाजार में बेचकर करोड़ों रुपए कमाए गए।
