चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों और पीयू के इंजीनियरों ने कमाल कर दिया है। हाइब्रिड डिजिटल तकनीक से युवती को नया चेहरा मिला है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल में पीजीआई की उपलब्धि दर्ज है। युवती को नई जिंदगी मिली है। युवती 30 साल की उम्र में चारे काटने वाली मशीन के हादसे में अपने चेहरे का बड़ा हिस्सा खो बैठी थी।
चंडीगढ़ पीजीआई के ओरल हेल्थ साइंसेज सेंटर की टीम ने पंजाब यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के साथ मिलकर चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है। संयुक्त टीम ने हाइब्रिड डिजिटल तकनीक के जरिये एक गंभीर रूप से घायल युवती का चेहरा दोबारा तैयार कर उसे नई जिंदगी दी है।
इसमें डॉ. भावना वाधवा, डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. मनीषा खन्ना, प्रो. प्रशांत जिंदल, प्रो. ममता जुनेजा और प्रशांत प्रकाश शामिल हैं। यह अनूठा शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल बीएमजे केस रिपोर्ट्स में फरवरी 2026 में प्रकाशित हुआ है जिसमें इलाज के सफल परिणामों को दर्ज किया गया है।
पीजीआई के डॉक्टरों ने पंपीयू के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) और डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआईसी) के विशेषज्ञों के साथ मिलकर हाइब्रिड तकनीक अपनाई। इस तकनीक के जरिये मरीज के चेहरे का सफल पुनर्निर्माण किया गया।
- मरीज के चेहरे की 3डी स्कैनिंग कर सटीक डिजिटल मॉडल तैयार किया
- कंप्यूटर एडेड डिजाइन से स्वस्थ हिस्से को आधार बनाकर क्षतिग्रस्त हिस्से का डिजाइन बनाया
- 3डी प्रिंटिंग तकनीक से कस्टम मोल्ड और हल्का ढांचा (शिम) तैयार किया
- कृत्रिम अंग का वजन कम रखने के लिए अंदर खोखला फ्रेम तैयार किया
- अंतिम प्रोस्थेसिस को मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन से पारंपरिक तकनीक के जरिये बनाया
- डिजिटल सटीकता और पारंपरिक कारीगरी का संयोजन कर प्राकृतिक लुक हासिल किया