चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से नगर निगम को फंड ट्रांसफर करते समय आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एक डेडिकेटेड खाता खोला गया था। इसी खाते के आधार पर बैंक मैनेजर की ओर से कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (एफडीआर) जारी की गई थीं। बाद में जब इन एफडीआर की जांच की गई तो वे फर्जी पाई गईं।

नगर निगम चंडीगढ़ से जुड़ा 116.84 करोड़ रुपये की फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) का मामला सामने आया है। नगर निगम की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से नगर निगम को फंड ट्रांसफर करते समय आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एक डेडिकेटेड खाता खोला गया था। इसी खाते के आधार पर बैंक मैनेजर की ओर से कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (एफडीआर) जारी की गई थीं। बाद में जब इन एफडीआर की जांच की गई तो वे फर्जी पाई गईं। इनकी कुल राशि 116.84 करोड़ रुपये बताई गई है।
जांच के दौरान आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पुलिस को जानकारी दी कि नगर निगम के खाते में पूरी राशि वापस जमा कर दी गई है। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने पहले यह गड़बड़ी हुई थी। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने हाल ही में पुलिस को शिकायत दी, जिस पर सोमवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब बैंक और नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में बैंक के कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी रडार पर हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में आईडीएफसी बैंक से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के घोटाले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें बैंक के पूर्व मैनेजर ऋभव ऋषि को गिरफ्तार किया गया था। मौजूदा मामले में भी ऋभव ऋषि का नाम सामने आने की बात कही जा रही है और पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।
पैसा सुरक्षित, ब्याज समेत 121 करोड़ वापस मिले: कमिश्नर
नगर निगम चंडीगढ़ के फंड को लेकर उठे सवालों के बीच नगर आयुक्त अमित कुमार ने कहा है कि निगम का पूरा पैसा सुरक्षित है और किसी तरह का घोटाला नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि निगम की 116 करोड़ रुपये की जमा राशि के बदले बैंक से ब्याज सहित करीब 121 करोड़ रुपये वापस मिल चुके हैं।
अमित कुमार ने कहा कि हरियाणा में इसी तरह का मामला सामने आने के बाद निगम के बैंक खातों की जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को दी गई है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जांच में एकाउंट ब्रांच के आउटसोर्स कर्मचारी अनुभव मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो मामले के सामने आने के बाद से लापता बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार कई बैंक खातों से उसका मोबाइल नंबर जुड़ा था और लेनदेन से जुड़े ओटीपी भी उसी के फोन पर आते थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।