IDFC Bank Fraud: 590 करोड़ की धोखाधड़ी कर ऐसे घुमाया पैसा, जांच एजेंसियां भी दंग; अब खुलने लगी परतें

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के विभिन्न खातों में 583 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मामले के मास्टरमाइंड एयू स्मॉल बैंक की जीरकपुर शाखा के मैनेजर रिभव ऋषि समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

IDFC Bank Fraud 590 crore rupees fraud haryana police investigation

रियाणा के सरकारी विभागों के आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा पैसे में धोखाधड़ी इस तरह से की गई थी कि आसानी से कोई पता न लगा सके लेकिन जांच में कड़ियां खुलतीं जा रही हैं।

 

सरकारी पैसे को सीधे इस्तेमाल न करने के बजाय आगे कुछ और खातों में डाल कर निकासी की गई। करीब 2000 ऐसे खाते हैं जिनमें पैसे का लेन देन हुआ। यह खाते या तो फर्जी कंपनियों के थे या निजी। जिन भी खातों में इस धोखाधड़ी के पैसे से आगे से आगे लेनदेन हुआ, उन्हें सीज कर दिया गया है।

 

विजिलेंस ने बुधवार को चंडीगढ़ की सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा में जाकर जांच की। अब तक 152 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि का पता चला है। इस राशि पर होल्ड लगा लिया गया है। इस राशि से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। ये खाते पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बंगलूरू और गुजरात के खाताधारकों के हैं। 

कई नामचीन सर्राफा कारोबारी जांच के दायरे में

सूत्रों के अनुसार कई नामचीन सर्राफा कारोबारियों के खाते भी जांच के दायरे में है। उनके 100 से अधिक खाते फ्रीज हुए हैं, जिनमें से 60 खाते तो अकेले चंडीगढ़ के स्वर्ण कारोबारियों के हैं। खाते सीज होने की शिकायतें चंडीगढ़ पुलिस के पास पहुंचीं। चंडीगढ़ के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने इस संबंध में हरियाणा पुलिस को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि चंडीगढ़ से जुड़े इन सभी मामलों की जांच हरियाणा पुलिस करे क्योंकि शिकायत वहीं दर्ज हुई है।

जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं कि धोखाधड़ी की राशि किन-किन माध्यमों से इन खातों में गई और बाद में उनका इस्तेमाल कैसे किया गया। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, धोखाधड़ी की रकम लेयरिंग के जरिए विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई। इसके बाद या तो रकम निकाल ली गई या सोना-चांदी खरीदकर ट्रांजेक्शन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। बड़ी रकम सीधे निकालने पर शक हो सकता था इसलिए ज्वेलरी खरीद के जरिए उसकी वैल्यू भी बढ़ाई गई और संदेह से बचने की कोशिश की गई। साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार केस हरियाणा के डीजी स्तर पर जांच के अधीन है। प्रभावित ज्वेलर्स को एक-एक कर बुलाकर संबंधित ट्रांजेक्शन की जानकारी ली जाएगी।

हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के प्रमुख अरशिंदर चावला ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सरकारी विभागों का पैसा सीधा इन निजी खातों या फर्जी कंपनियों के खातों में आरटीजीएस, चेक और डेबिट नोट के माध्यम से ट्रांसफर किया गया। एक बार सरकारी खाते से निकलकर पैसा इन फर्जी कंपनियों के अकाउंट में आ गया तो रिभव ऋषि और उसके साथी अभय ने ऐसा सिस्टम बनाया कि उस पैसे को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। एसीबी ने मंगलवार रात को रिभव, अभय और अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक सिंगला को गिरफ्तार कर लिया।

स्वाति और अभिषेक के नाम पर बनीं फर्जी कंपनियां

चावला ने बताया कि रिभव ऋषि के कहने पर अभय कुमार ने स्वाति और अभिषेक के नाम पर फर्जी कंपनियां शुरू कीं। हरियाणा सरकार के जिन विभागों का पैसा बैंक में मौजूद था उसे इन फर्जी कंपनियों के खातों में डिपार्टमेंटल पेमेंट के तौर पर भेजने की साजिश रची गई। इसके लिए स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला को बिजनेस पार्टनर बताते हुए स्वास्तिक देश इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कैपको और स्वदेश जैसे नामों से कई फर्जी कंपनियां बनाई गई।

एसीबी प्रमुख ने बताया कि कुछ वीडियो सामने आने पर मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के विदेश फरार होने की आशंका बढ़ने लगी थी। इसके बाद सभी एयरपोर्ट पर उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करवा दिया गया था लेकिन तब तक आरोपी और उसके सहयोगी गिरफ्त में आ गए।

स्वास्तिक देश इंडिया फर्म से ही 300 करोड़ का लेनदेन

जांच में सामने आया कि अकेले स्वास्तिक देश इंडिया फर्म से जरिए ही सरकारी खातों से 300 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। धोखाधड़ी की राशि की में हेराफेरी करने के लिए स्वास्तिक देश इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कैपको, स्वदेश जैसी बोगस फर्मों का इस्तेमाल किया गया। इन सभी बोगस फर्मों के पंजीकरण सहित अन्य दस्तावेजों की जांच कर एसीबी सहयोगी आरोपियों की पहचान करने में लगी है।

हरियाणा ही नहीं, चंडीगढ़ प्रशासन के विभागों से भी हुई धोखाधड़ी

चावला ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन के कुछ विभागों के पैसे की भी धोखाधड़ी हुई है। चावला ने सरकारी विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि पहले निजी आरोपियों को दबोचना जरूरी था। कहा कि सरकारी कर्मचारी या अधिकारी तो भाग नहीं जाएंगे। इसलिए इन चारों की गिरफ्तारी के बाद सरकारी विभागों के एंगल पर जारी तेज की गई है।

पैसा निकाला और बंद करवा दिए 100 से अधिक खाते

सूत्रों के अनुसार ये आरोपी 100 से अधिक ऐसे बैंक खाते बंद करवा चुके हैं जिनके जरिए धोखाधड़ी की राशि ट्रांसफर कर निकाल चुके हैं। इन्हीं बैंक खातों में लेनदेन की जांच एसीबी की एक टीम कर रही है। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला (ट्राईसिटी) से लेकर गुरुग्राम तक ज्वेलर्स, बिल्डर्स, रियल एस्टेट, शेयर मार्केट, शराब कारोबारियों के खातों में धोखाधड़ी की राशि ट्रांसफर करवाई गई है। यह मामला प्रकाश में आने के बाद सभी एसीबी के रडार पर है, जिनकी तकनीकी एंगल से जांच के साथ-साथ उनसे लगातार पूछताछ चल रही है।

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