ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर दर्दनाक हादसा हुआ है। अब लापरवाही के गड्ढे में डूबने से मासूम की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुचर जमीन में बने गड्ढे की तारबंदी कराने की मांग की गई थी, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक मासूम की लापरवाही के गड्ढे में डूबकर मौत हो गई। एक ही महीने पहले नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता फिर दिल्ली में कमल और अब रविवार को ग्रेटर नोएडा में लापरवाही के गड्ढे का शिकार तीन साल का मासूम देवांश हो गया।
गांव दलेलगढ़ में वह अपने मामा के घर धार्मिक अनुष्ठान में आया था। शनिवार दोपहर खेलते-खेलते छह से सात फीट गहरे गड्ढे में गिर गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुचर भूमि पर यह गड्ढा है। ग्रेनो प्राधिकरण से इसकी तारबंदी कराने के लिए शिकायत कई बार की गई थी लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं बरती है। प्राधिकरण का दावा है कि यह जमीन किसान की है।
इसी आयोजन में अंजली बेटे देवांश और अन्य परिजनों के साथ आई थीं। भंडारे के दौरान देवांश अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते गड्ढे में डूब गया। कुछ देर बाद उसका कोई पता न चलने पर परिजन और रिश्तेदार उसे ढूंढने लगे लेकिन कुछ पता नहीं चला।
इसी दौरान किसी ने समाधि स्थल के निकट गड्ढे में भरे पानी में बच्चे की टोपी देखी। लोग फौरन पानी में उतरे और बच्चे को निकाला। आनन फानन उसे नजदीकी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत पर समारोह स्थल पर मातम छा गया। इस दौरान परिजन का भी रो-रोकर हाल बेहाल हो गया।
ग्रामीण अमित भाटी, कृष्णकांत शर्मा, विनोद, लीलू प्रधान, रवि आदि ने बताया कि जिस गड्ढे में मासूम डूब, वह पशुचर जमीन में है। उन्होंने कहा कि जब जिसका मन किया उसने यहां से मिट्टी निकाल ली। कभी प्राधिकरण तो कभी ग्रामीण इस जमीन से मिट्टी ले गए और इस तरह यह जानलेवा गड्ढा बनता गया।
हादसे की खबर मिलते ही वर्क सर्किल के सीनियर मैनेजर को मौके पर भेजा गया। जांच में पता चला कि खसरा संख्या 373 की भूमि पर यह गड्ढा है जिसमें पानी भरा है। यह भूमि वहां पर ग्रामीण गंगाराम और धर्मवीर की है। इसके चलते प्राधिकरण सीधे कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। -एके सिंह, जीएम, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण