पूर्व मेयर ने पत्र में साफ कहा है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्रतिष्ठा जनता के विश्वास से जुड़ी है। अगर प्रशासनिक अधिकारियों के किसी भी कार्य या निर्णय से उनकी साख को नुकसान होता है, तो उन्हें न्यायिक उपाय अपनाने का अधिकार है।

नगर निगम की पूर्व मेयर शैलजा संदीप सचदेवा ने नगर निगम आयुक्त के कथित कृत्यों के कारण हुई मानहानि के मुद्दे को लेकर हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कानूनी कार्रवाई हेतु अनुमति मांगी है। उन्होंने पत्र में बताया है कि आयुक्त के कुछ निर्णयों और प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कारण उनकी प्रतिष्ठा तथा सार्वजनिक छवि को गंभीर रूप से ठेस पहुंची है और इसी आधार पर वे मानहानि का मुकदमा दायर करना चाहती हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब शैलजा सचदेवा अंबाला में भाजपा की पहली निर्वाचित महिला मेयर थीं। मार्च 2025 के नगर निगम उपचुनाव में उन्होंने 20,487 मतों के साथ विजय प्राप्त की थी।
कई मौकों पर प्रोटोकॉल का हुआ उल्लंघन
शैलजा संदीप सचदेवा ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल के दौरान नगर निगम प्रशासन द्वारा कई मौकों पर मानक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया और पराजित विधायक तथा कुछ अन्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने विशेष रूप से यह उल्लेख किया है कि कई शिलान्यास एवं उद्घाटन कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित न करने तथा सूचना पट पर उनके नाम को गलत तरीके से प्रकाशित करने जैसे कृत्यों से उनके पद की गरिमा को नुकसान पहुँचा है, जो स्थापित सरकारी नियमों के विरुद्ध है।
शैलजा संदीप सचदेवा ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल के दौरान नगर निगम प्रशासन द्वारा कई मौकों पर मानक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया और पराजित विधायक तथा कुछ अन्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने विशेष रूप से यह उल्लेख किया है कि कई शिलान्यास एवं उद्घाटन कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित न करने तथा सूचना पट पर उनके नाम को गलत तरीके से प्रकाशित करने जैसे कृत्यों से उनके पद की गरिमा को नुकसान पहुँचा है, जो स्थापित सरकारी नियमों के विरुद्ध है।
निष्पक्ष कार्रवाई की मांग रखी
पूर्व मेयर ने पत्र में साफ कहा है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्रतिष्ठा जनता के विश्वास से जुड़ी है। अगर प्रशासनिक अधिकारियों के किसी भी कार्य या निर्णय से उनकी साख को नुकसान होता है, तो उन्हें न्यायिक उपाय अपनाने का अधिकार है। उन्होंने मुख्य सचिव से मामले की निष्पक्ष समीक्षा और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है। नगर निगम प्रशासन की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। अब यह देखना होगा कि मुख्य सचिव कार्यालय इस अनुरोध पर क्या निर्णय लेता है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके।
पूर्व मेयर ने पत्र में साफ कहा है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्रतिष्ठा जनता के विश्वास से जुड़ी है। अगर प्रशासनिक अधिकारियों के किसी भी कार्य या निर्णय से उनकी साख को नुकसान होता है, तो उन्हें न्यायिक उपाय अपनाने का अधिकार है। उन्होंने मुख्य सचिव से मामले की निष्पक्ष समीक्षा और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है। नगर निगम प्रशासन की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। अब यह देखना होगा कि मुख्य सचिव कार्यालय इस अनुरोध पर क्या निर्णय लेता है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके।