AAP नेता लक्की ओबरॉय हत्याकांड: प्रधानगी की जंग से सड़क की सियासत तक, कॉलेजों में बढ़ते वर्चस्व में गई जान

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NIMRA SALEEM

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जालंधर के मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा साहिब के बाहर शुक्रवार को आम आदमी पार्टी नेता लक्की ओबेरॉय की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने इस वारदात को सुबह करीब सवा आठ बजे उस समय अंजाम दिया जब लक्की गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के बाद अपनी थार गाड़ी में बैठे थे।

AAP leader Lucky Oberoi murder in Jalandhar

महानगर जालंधर में कॉलेजों की प्रधानगी को लेकर चल रही वर्चस्व की लड़ाई शुक्रवार सुबह सड़कों पर उतर आई। आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबरॉय की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।

राजनीतिक और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ओबरॉय का असर अब केवल मोहल्ला या वार्ड तक सीमित नहीं रहा था, बल्कि कॉलेज परिसरों की प्रधानगी और उससे जुड़े फैसलों में उनका दखल लगातार बढ़ रहा था। यही बढ़ता प्रभाव कुछ स्थापित गुटों को खटकने लगा और धीरे-धीरे यह टकराव खुली दुश्मनी में बदल गया। कॉलेज सियासत में लक्की ओबरॉय की पहचान एक प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभर रही थी लेकिन इसी उभार ने उन्हें निशाने पर ला खड़ा किया। कॉलेज विद्यार्थी के समय से ही वह लगातार स्टूडेंट्स राजनीति में जुड़े रहे थे।

कॉलेजों की प्रधानगी को केवल छात्र राजनीति नहीं, बल्कि स्थानीय सियासत का पावर सेंटर माना जाता है। छात्र यूनियन, ट्रस्ट, फंड, ठेके और नियुक्तियों तक पहुंच रखने वाले चेहरे आगे चलकर नगर की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। लक्की ओबरॉय का राजनीतिक ग्राफ भी इसी गलियारे से ऊपर चढ़ता बताया जा रहा है। आप में उसकी गिनती दूसरी कतार के नेताओं में होती थी।

शुरुआत में टकराव सोशल मीडिया पोस्ट, परोक्ष चेतावनियों और दबाव तक सीमित रहा। 25 दिसंबर को एक समूह की चेतावनी भरी पोस्ट को भी इसी कॉलेज सियासत की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्थानीय सत्ता, कॉलेज नेटवर्क और पार्टी की हिमायत इन तीनों का मेल अक्सर हालात को विस्फोटक बना देता है। लक्की ओबरॉय इसी संगम का चेहरा बनते जा रहे थे। 27 जनवरी को लक्की ओबरॉय का जन्मदिन मनाया गया था। मॉडल टाउन के दुकानदारों, युवाओं और समर्थकों ने केक काटे, लंबी उम्र की दुआएं मांगीं। फेसबुक लाइव में हंसी-ठहाके, नारे और गिफ्ट नजर आए लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जश्न के महज 11 दिन बाद यह खुशी गम में बदल जाएगी।

लक्की ओबरॉय की आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट उनकी सियासी सक्रियता को दिखाती है। उन्होंने छह फरवरी की सुबह खुरालगढ़ के लिए बसें रवाना करने की जानकारी साझा की थी। गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के बाद वह इसी कार्यक्रम की तैयारी में थे, लेकिन बसें चलने से पहले ही गोलियों ने उनकी राह रोक दी।

आम आदमी पार्टी में तेजी से उभरे
फाइनेंस और रियल एस्टेट से जुड़े लक्की ओबरॉय 2022 के बाद आम आदमी पार्टी में तेजी से उभरे। हलका कैंट से आप इंचार्ज राजविंदर कौर थियाड़ा के करीबी माने जाने लगे। नगर निगम चुनाव में पत्नी को मैदान में उतारना भी उनके बढ़ते राजनीतिक आत्मविश्वास का संकेत माना गया। श्रीराम अस्पताल में मां का बार-बार बेटे की हालत पूछना और पत्नी का प्रार्थना करना सभी को भावुक कर गया।

 

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Author: NIMRA SALEEM