Rajasthan Assembly: मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और कफ सिरप मौतों पर कांग्रेस-बीजेपी विधायकों में तीखी झड़प

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राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने योजना में कम राशि पर सवाल उठाया, जबकि कफ सिरप से बच्चों की मौत को लेकर विपक्ष और सरकार में तीखी बहस हुई। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने बताया कि मौतें ओवरडोज और को-मॉरबिडिटी के कारण हुईं, दवा की दोषारोपण नहीं।

Rajasthan Assembly:मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और कफ सिरप मौतों पर  कांग्रेस-बीजेपी विधायकों में तीखी झड़प - Sharp Exchange Over Chief  Minister's Free Medicine Scheme And Cough ...

प्रश्नकाल में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना को लेकर हंगामा हो गया। कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने सरकार से सवाल पूछा कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद योजना में राशि का आवंटन कम क्यों किया जा रहा है। इसके बाद जब उन्होंने कफ सिरप मामले को लेकर पूरक प्रश्न पूछा तो स्वास्थ मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि मूल प्रश्न से इसका कोई लेना देना नहीं है इसलिए इसका उन्होंने जवाब नहीं दिया। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कफ सिरप भी मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में ही आती है इसलिए यह कहना सही नहीं कि यह मूल प्रश्न से संबंधित नहीं है। इस पर कांग्रेस और बीजेपी विधायकों के बीच तीखी नौक-झौंक हो गई।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान (दवा) योजना के तहत उपलब्ध करवाई जाने वाली दवाओं का खर्चा कम नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में 1 हजार 572 करोड़ रुपये व्यय किये गए। इसी प्रकार वर्ष 2024 में 1 हजार 725 तथा वर्ष 2025 में 1 हजार 656 करोड़ रुपये व्यय किये गए। उन्होंने बताया कि आरजीएचएस योजना के तहत वर्ष 2023- 24 में 19.71 करोड़ लोगों को लाभान्वित किया गया। इसी प्रकार वर्ष 2024-25 में 19.95 करोड़ तथा वर्ष 2025-26 में दिसम्बर तक 15.73 करोड़ व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया है।
इसके बाद कफ सिरप से हुई मौतों को लेकर सदन में हंगामा हुआ। हरिमोहन शर्मा ने पूछा कि कफ सिरप से हुई मौतों को लेकर सरकार ने क्या जांच करवाई और किन-किन लोगों को दोषी पाया गया। चिकित्सा मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि  कफ सिरप से प्रदेश में कफ सीरप से हुई मौतों दवा की वजह से नहीं बल्की ओवर डोज की वजह से हुईं थी। उन्होंने कहा कि बच्चों के माता-पिता ने उन्हें तय मात्रा से ज्यादा कफ सीरप दे दी थी। यह सीरप सरकारी अस्पताल के किसी डॉक्टर ने प्रेस्क्राइब नहीं की थी।  उन्होंने कहा कि  जांच में सामने आया कि माता पिता द्वारा दो साल के बच्चे को बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप दिया गया तथा दवा की ओवरडोज के चलते बच्चे की मृत्यु हो गई। अन्य मामलों में कोमॉरबिडिटी (साथ में अन्य बिमारियां) के चलते बच्चों की मौत हुई।  इस पर जूली ने कहा कि जिस दवा कंपनी को सरकार क्लीन चिट दे रही है उसी की कफ सीरप पीने से दूसरे राज्यों में भी बच्चों की मौतें हुई हैं।
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