बारामती में हुए विमान हादसे के बाद जिस चार्टर प्लेन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है, वह आकार में भले ही छोटा था, लेकिन तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील विमान माना जाता है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसे का शिकार हुआ यह विमान करीब 9700 किलो वज़नी था और इसका विंगस्पैन लगभग 47 फीट बताया जा रहा है। यह एक छोटा प्राइवेट/चार्टर जेट था, जिसे खासतौर पर वीवीआईपी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।


बताया जा रहा है कि इस विमान के केबिन में खड़े होकर चलने की सुविधा नहीं थी। यात्रियों को सीट पर बैठकर ही सफर करना पड़ता था। सीमित जगह होने के बावजूद इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, ऑटो-पायलट फीचर्स और सेफ्टी इक्विपमेंट लगे हुए थे। हालांकि, खराब मौसम और कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में ऐसे विमानों की लैंडिंग बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।
एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छोटे जेट विमानों का संतुलन लैंडिंग के वक्त बेहद सटीक गणनाओं पर निर्भर करता है। रनवे से थोड़ी सी चूक या तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हादसे वाले दिन भी जैसे ही विमान लैंडिंग की प्रक्रिया में था, तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और वह रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान की बनावट की बात करें तो इसका ढांचा हल्का लेकिन मजबूत एलॉय मटीरियल से बना होता है। सीमित सीटें, संकरा केबिन और कम ऊंचाई इसकी पहचान मानी जाती है। यही वजह है कि ऐसे विमानों में इमरजेंसी के समय यात्रियों के लिए मूवमेंट की गुंजाइश बेहद कम रह जाती है।
फिलहाल नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम विमान के मलबे की जांच कर रही है। ब्लैक बॉक्स, इंजन, लैंडिंग गियर और नेविगेशन सिस्टम की गहन जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मौसम या मानवीय चूक की वजह से हुआ। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही क्रैश हुए विमान की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।