उत्तर प्रदेश: हाल ही में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। मामला जुड़ा है अलंकार केस से, जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट पर कई आरोप लगे।

जानकारी के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा इस आधार पर दिया कि उन्हें आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया था, जबकि वे इसे अन्यायपूर्ण और आधारहीन मानते थे। उनका कहना है कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के कारण उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा।
अलंकार केस की क्रोनोलॉजी:
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प्रारंभ में सिटी मजिस्ट्रेट ने कुछ प्रशासनिक आदेश जारी किए, जिन्हें लेकर विवाद खड़ा हुआ।
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इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और मजिस्ट्रेट पर निगरानी और आरोप लगने लगे, जिससे उनका पद सस्पेंड हो गया।
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इस बीच उन्होंने स्वयं इस्तीफा देकर यह जताया कि वे स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं और सत्ता या दबाव में काम नहीं करना चाहते।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि सिविल सेवा और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, विपक्ष और मीडिया ने इस मामले को प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से उठाया है।
डिप्टी कमिश्नेंट और सिटी मजिस्ट्रेट दोनों मामलों में स्पष्ट है कि व्यक्तिगत और पेशेवर नैतिकता के चलते ही ये निर्णय लिए गए।




