लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब मकान और जमीन की रजिस्ट्री कराना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने जा रहा है। राज्य सरकार रजिस्ट्री व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी कर रही है। इसके तहत पासपोर्ट कार्यालय की तर्ज पर आधुनिक रजिस्ट्री ऑफिस बनाए जाएंगे, जहां तय समय में पारदर्शी और सुविधाजनक तरीके से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होगी। सबसे बड़ी राहत यह होगी कि रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (नामांतरण) की प्रक्रिया स्वतः पूरी हो जाएगी, जिससे लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री ऑफिस पूरी तरह डिजिटल होंगे। यहां ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, टोकन सिस्टम, दस्तावेजों की डिजिटल जांच और एक ही छत के नीचे सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह आवेदकों को निर्धारित समय पर बुलाया जाएगा, जिससे लंबी कतारों और अनावश्यक देरी से निजात मिलेगी। साथ ही भ्रष्टाचार और दलालों की भूमिका पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
दाखिल-खारिज को रजिस्ट्री से जोड़ने का फैसला आम जनता के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अभी तक रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील और लेखपाल स्तर पर अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी, जिसमें महीनों का समय लग जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री होते ही राजस्व रिकॉर्ड में स्वतः नाम दर्ज हो जाएगा, जिससे जमीन-मकान से जुड़े विवाद भी कम होंगे।
राज्य सरकार का कहना है कि इस सुधार से न सिर्फ आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राजस्व व्यवस्था भी अधिक मजबूत और पारदर्शी बनेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ जिलों में इसे लागू करने की तैयारी है, जिसके बाद पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में जमीन-मकान से जुड़े कामकाज में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

