किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक का आयोजन 30 जनवरी से 1 फरवरी तक प्रस्तावित है।2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किला रायपुर समेत देशभर में बैलगाड़ी दौड़ पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

लुधियाना के किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक में एक बार फिर से बैलगाड़ी दौड़ की वापसी होने जा रही है। यदि खेलों के शुरू होने तक कोई नई कानूनी बाधा सामने नहीं आई तो करीब 11 वर्षों बाद यह पारंपरिक और ऐतिहासिक प्रतियोगिता दोबारा देखने को मिलेगी। किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक का आयोजन 30 जनवरी से 1 फरवरी तक प्रस्तावित है।
2014 में लगी थी रोक
साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किला रायपुर समेत देशभर में बैलगाड़ी दौड़ पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अदालत ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का हवाला देते हुए इस खेल पर रोक लगाई थी। इसके बाद से ही किला रायपुर खेलों की रौनक फीकी पड़ गई थी।
पंजाब सरकार के फैसले से खुला रास्ता
पंजाब सरकार ने 11 जुलाई को विधानसभा में एक विधेयक पारित कर बैलगाड़ी दौड़ के आयोजन का रास्ता साफ कर दिया। सरकार के इस फैसले से ग्रामीण ओलिंपिक में सबसे बड़े आकर्षण की वापसी संभव हो सकी है। पिछले कुछ वर्षों से राज्य सरकार स्वयं इन खेलों के आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही है।
किला रायपुर खेलों की जान रही है बैलगाड़ी दौड़
बैलगाड़ी दौड़ शुरू से ही किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक का मुख्य आकर्षण रही। प्रतिबंध के बाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई। दौड़ बंद होने से खेल उत्सव की पहचान लगभग खत्म हो गई थी।
इन सख्त शर्तों के साथ होगी बैलगाड़ी दौड़
- दौड़ से पहले सभी बैलों की वेटरनरी डॉक्टरों द्वारा जांच
- दौड़ के दौरान और बाद में भी वेटरनरी टीम की मौजूदगी
- किसी भी तरह की मारपीट, नुकीले औजार या क्रूरता पर पूर्ण प्रतिबंध
- अत्यधिक गर्मी या खराब मौसम में दौड़ नहीं करवाई जाएगी
- सभी प्रतिभागियों और बैलों का पूर्व पंजीकरण अनिवार्य
- नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई और प्रतिबंध
1933 में इंदर सिंह ग्रेवाल ने रखी थी नींव
किला रायपुर ग्रामीण खेलों की शुरुआत वर्ष 1933 में लुधियाना के किला रायपुर निवासी इंदर सिंह ग्रेवाल ने की थी। इन खेलों का उद्देश्य पंजाब के किसानों को एक मंच पर लाना और ग्रामीणों के मनोरंजन के लिए पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना था। यही खेल आगे चलकर “पंजाब का मिनी ओलिंपिक” कहलाए।