रोहताश खिलेरी माउंट एवरेस्ट पर भी 24 घंटे रुककर रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। लेकिन ये और भी मुश्किल है। यहां न्यूनतम तापमान 60 से 70 डिग्री माइनस में चला जाता है। अभी तक माउंट एवरेस्ट पर 21 घंटे रुकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, जो नेपाल के बाबुश्री शेरपा के नाम है।

यूरोप महाद्वीप की (5,642 मीटर ) सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस को विंटर और समर में फतह कर चुके हिसार के गांव मलापुर निवासी रोहताश खिलेरी ने एक बार फिर नया कीर्तिमान रच दिया है। रोहताश ने इसी माउंट एलब्रुस की छोटी पर 24 घंटे रुकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने दावा किया है कि ऐसा करने वाले वे विश्व के पहले व्यक्ति बन गए हैं। रोहताश ने चोटी फतह करने के बाद एक वीडियो साझा किया है। जिसमें वो बता रहे हैं कि माइनस 40 डिग्री तापमान और 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हवा के बीच उन्होंने ये उपलब्धि हासिल की है।
यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर 24 घंटे रुकने का रिकॉर्ड बनाने का प्रयास वे पांच साल पहले भी कर चुके हैं, लेकिन गाइड की तबीयत खराब होने के चलते उन्हें अपना यह मिशन रोकना पड़ा था। अब कामयाबी मिल गई है। रोजाना 8 घंटे प्रेक्टिस, 2 घंटे की स्विमिंग और मेडिटेशन की बदौलत उन्हें मंजिल मिल सकी है।
माउंट एवरेस्ट पर भी 24 घंटे बिताना है लक्ष्य
रोहताश खिलेरी माउंट एवरेस्ट पर भी 24 घंटे रुककर रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। लेकिन ये और भी मुश्किल है। यहां न्यूनतम तापमान 60 से 70 डिग्री माइनस में चला जाता है। अभी तक माउंट एवरेस्ट पर 21 घंटे रुकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, जो नेपाल के बाबुश्री शेरपा के नाम है। जिन्होंने इसे करीब 22 साल पहले 1999 में बनाया था।
रोहताश खिलेरी माउंट एवरेस्ट पर भी 24 घंटे रुककर रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। लेकिन ये और भी मुश्किल है। यहां न्यूनतम तापमान 60 से 70 डिग्री माइनस में चला जाता है। अभी तक माउंट एवरेस्ट पर 21 घंटे रुकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, जो नेपाल के बाबुश्री शेरपा के नाम है। जिन्होंने इसे करीब 22 साल पहले 1999 में बनाया था।
रोहताश खिलेरी की उपलब्धियां
- माउंट एवरेस्ट फतेह 16 मई 2018
- माउंट किलिमंजारो 23 जुलाई 2018
- माउंट एलब्रुस 4 सितंबर 2018
- माउंट एलब्रुस 1 फरवरी 2020
- माउंट फ्रेंडशिप 9 अक्टूबर 2020
- माउंट मून 1 नवंबर 2020
- माउंट किलोमंजेरो पर 23 मार्च 2021 को 24 घंटे रूकने का रिकॉर्ड
- रोहताश खिलेरी बिश्नोई एलब्रुस को समर और विंटर में फतेह करने वाले पहले भारतीय हैं।