नसबंदी के बाद महिला की मौत के मामले ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अंतिम संस्कार के बाद जब चिता की राख को एकत्र किया गया, तो उसमें से सर्जिकल कैंची मिलने से सनसनी फैल गई। इस खुलासे ने न केवल परिजनों को झकझोर दिया, बल्कि सरकारी अस्पतालों में की जा रही सर्जरी और लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों के अनुसार, महिला की नसबंदी एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र/अस्पताल में कराई गई थी। ऑपरेशन के कुछ ही घंटों/दिनों बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार ने पहले ही डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था, लेकिन चिता की राख में सर्जिकल उपकरण मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदर सर्जिकल कैंची या उसका हिस्सा छूट जाना ही मौत की वजह हो सकता है।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस ने मामले की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी पूरे मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं और ऑपरेशन थिएटर से जुड़े रिकॉर्ड, सर्जरी रजिस्टर और इस्तेमाल किए गए उपकरणों की जानकारी खंगाली जा रही है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऑपरेशन के दौरान कोई सर्जिकल उपकरण शरीर में छूट जाता है, तो यह घातक संक्रमण और आंतरिक रक्तस्राव का कारण बन सकता है। यह मामला मेडिकल प्रोटोकॉल और सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट के पालन में भारी चूक की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।
वहीं, मृतका के परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक महिला की मौत नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसे के साथ खिलवाड़ है।
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और मेडिकल बोर्ड की राय के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। लेकिन चिता की राख से सर्जिकल कैंची मिलने की यह घटना सिस्टम की बड़ी लापरवाही को उजागर कर चुकी है और आने वाले दिनों में इस मामले पर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज होने की संभावना है।