हमारे देश में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस यानी कि इंडियन आर्मी डे के रूप में मनाया जाता है। इस साल देश में 78वां सेना दिवस सेलिब्रेट किया जा रहा है। वीरवार को सेना दिवस के मौके पर भारतीय सेना की ओर से जयपुर में आयोजित होने वाली परेड में भी सैनिकों के साथ स्मार्ट मशीनों का शक्तिशाली संगम देखने को मिलेगा।

देश की सबसे संवदेनशील उत्तरी-पश्चिमी सीमाएं भावी खतरों से और महफूज रहेंगी, क्योंकि इन सीमाओं की निगहबानी का जिम्मा संभाल रहीं भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण वेस्टर्न व नॉर्दर्न कमांड खुद को फ्यूचर वॉर फेयर केंद्रित तकनीकों के जरिये अपग्रेड कर रही हैं। इसके लिए आधुनिकीकरण, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता पर मुख्य फोकस रखते हुए तैयारी की जा रही है।
आधुनिक हथियारों, वाहनों, रोबोट, ड्रोन इत्यादि नई तकनीक के उपकरणों से जवानों को लैस किया जा रहा है। इसी दिशा में खड्गा कोर को ड्रोन हब बनाने की तैयारी चल रही है जबकि दुश्मन के इलाके में डीप स्ट्राइक की क्षमता भी अपेक्षाकृत बढ़ाने पर काम चल रहा है।

इस सैन्य ऑपरेशन ने यह झलक भी दिखा दी है कि फ्यूचर वॉर फेयर साहस संग तकनीक पर ज्यादा आधारित होगा। इसी के मद्देनजर भारतीय सेना ने साल 2026 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी का वर्ष घोषित किया है। इसका मकसद सेना को भविष्य के लिए तैयार करना है जिसके तहत बेहतर कनेक्टिविटी, त्वरित निर्णय और युद्ध क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
उतरी-पश्चिमी सीमाओं की बात करें तो करीब 2313 किलोमीटर सीमा पाकिस्तान से सटी है जबकि 772 किलोमीटर लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन सीमाओं की सुरक्षा और निगहबानी को लेकर भारतीय सेना की गंभीरता भी बढ़ी है।

ऑपरेशनल तैयारियों की हो रही समीक्षा
वेस्टर्न व नॉर्दर्न कमांड की विभिन्न कोर के अंतर्गत सैन्य यूनिटें इन दिनों युद्ध के लिए हमेशा तैयार विजन के साथ काम कर रही हैं। कॉम्बैट इंजीनियरिंग टास्क को पूरा करने में इनोवेशन व तकनीक अपनाने पर ज्यादा काम हो रहा है। आला अफसर लगातार फील्ड में इन ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।
पश्चिमी सीमाओं पर आर्मी के एयर डिफेंस को भी और मजबूत किया जाएगा। एक सैन्य अफसर ने बताया कि इसके अलावा भारतीय सेना में ड्रोन और इससे संबंधित तकनीकों को अपनाने में आने वाली चुनौतियों, मुश्किलों और आगे का रास्ता क्या…, भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, हाल की लड़ाइयों से मिले सबक और सेना के ड्रोन इको सिस्टम को मजबूत करने के लिए रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।

सेंटर ऑफ एक्सपर्टाइज भी तैयार
नॉर्दर्न कमांड भी विभिन्न युद्ध तकनीकों के बूते आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। सेंटर ऑफ एक्सपर्टाइज इसका एक बड़ा उदाहरण है। ड्रोन बनाने, उनकी मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए विशेषज्ञों की तैनाती वाले इस सेंटर की अहम भूमिका है। हाई लेवल स्किल वाले इस सेंटर में उपकरणों की रिपेयर व मेंटेनेंस सुविधाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है।