केरियां के नजदीकी गांव उमरपुर में कथित तौर पर ड्रग्स के ओवरडोज से एक नौजवान की मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवाया गया है।

पंजाब सरकार की ड्रग्स के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम पर मुकेरियां के नजदीकी गांव उमरपुर में कथित तौर पर ड्रग्स के ओवरडोज से एक नौजवान की मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवाया गया है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही इसी गांव में पुलिस और सिविल प्रशासन की ओर से एंटी ड्रग अवेयरनेस कैंप लगाया गया था।
मृतक की मां बब्बू ने बताया कि वह लोगों के घरों में काम करके अपने परिवार का गुजारा करती हैं। उनका बेटा अजय कुमार गिल नशे की लत का शिकार था। उन्होंने बताया कि बीती रात करीब 2:30 बजे तक वह अपने बेटे को ढूंढती रही, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। तड़के करीब 3 बजे जब वह उठी तो उन्होंने देखा कि अजय घर के दरवाजे पर मृत अवस्था में पड़ा था। उसके हाथ में कथित तौर पर ड्रग्स से भरी सिरिंज थी और पास ही वैक्स पेपर भी पड़ा था, जिसका इस्तेमाल नशे की पुड़िया बनाने में किया जाता है।
मां का आरोप है कि गांव में बड़े पैमाने पर नशे की बिक्री हो रही है। इस बारे में उन्होंने पंचायत को भी अवगत कराया था, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने के कारण उनके बेटे की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रग्स तस्करों की पुलिस से मिलीभगत है और पंचायत भी जानबूझकर चुप्पी साधे हुए है। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी दावा किया कि गांव में खुलेआम नशा बिक रहा है। कुछ लोगों ने पुलिस के खुफिया विभाग को यह भी बताया था कि गांव की एक पंच के घर का नौकर नशा बेचता है, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने पुलिस पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट से मिली है। 9 जनवरी को लगाए गए जागरूकता कैंप के दौरान किसी भी ग्रामीण ने नशा बिकने की शिकायत नहीं की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ सख्त है। मृतक के परिजनों के बयानों के आधार पर अजय गिल को अपने साथ ले जाने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।