देश के अलग–अलग हिस्सों में चुनाव प्रक्रिया भले एक जैसी दिखती हो, लेकिन कुछ राज्यों में मतदान का तरीका पूरी तरह अलग है। इन दिनों एक खास मॉडल चर्चा में है, जहां हर मतदाता को एक नहीं बल्कि चार वोट डालने का अधिकार मिलता है। यही वजह है कि लोग हैरान हैं कि जब मुंबई जैसे शहरों में सिर्फ एक ही वोट पड़ता है, तो यहां चार वोट क्यों? चुनाव विशेषज्ञों के मुताबिक यह व्यवस्था स्थानीय निकाय चुनावों के ढांचे और प्रतिनिधित्व को मजबूत बनाने के लिए बनाई गई है।

दरअसल इस मॉडल में मतदाता अलग–अलग स्तर पर अपने प्रतिनिधि चुनता है। पहला वोट वार्ड पार्षद के लिए, दूसरा नगर प्रमुख या मेयर के लिए, तीसरा जिला स्तर के प्रतिनिधि के लिए और चौथा किसी विशेष निकाय या समिति के लिए डाला जाता है। इसका मकसद यह है कि जनता सीधे हर स्तर पर अपनी पसंद का नेतृत्व चुन सके। इससे सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है और स्थानीय विकास के फैसलों में जनता की भागीदारी बढ़ती है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली पूरी तरह संवैधानिक है और कई राज्यों में पहले से लागू है। हालांकि मुंबई महानगर में बीएमसी चुनाव का ढांचा अलग होने के कारण यहां मतदाता केवल पार्षद के लिए एक ही वोट देता है। मेयर और अन्य पदों का चुनाव बाद में चुने हुए पार्षदों के माध्यम से होता है, इसलिए मतदाता को सीधे कई वोट डालने का मौका नहीं मिलता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चार वोट वाला मॉडल लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाता है, लेकिन इससे मतदान प्रक्रिया थोड़ी जटिल भी हो जाती है। मतदाताओं को सही जानकारी न मिले तो भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसलिए चुनाव आयोग जागरूकता अभियान चला रहा है, ताकि लोग समझ सकें कि वे किस–किस पद के लिए वोट डाल रहे हैं और उनका हर वोट कितना अहम है।