महाराष्ट्र में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है और इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राज ठाकरे ने दावा किया है कि चुनाव से ठीक पहले नियमों में बदलाव कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरते हुए सवाल उठाया है कि आखिर चुनाव की घोषणा के बाद या मतदान से पहले नियम बदलने की क्या जरूरत पड़ गई।

राज ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन हालिया फैसले आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। उनका आरोप है कि नियमों में अचानक किए गए बदलाव से कुछ राजनीतिक दलों को फायदा पहुंच सकता है, जबकि आम उम्मीदवार और मतदाता भ्रम की स्थिति में आ जाते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक कदम बताया।
MNS प्रमुख ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया में स्थिरता और स्पष्टता बेहद जरूरी होती है। अगर बार-बार नियम बदले जाएंगे, तो न सिर्फ राजनीतिक दलों को नुकसान होगा, बल्कि आम मतदाता का भरोसा भी कमजोर पड़ेगा। राज ठाकरे ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह नियमों में किए गए बदलावों को लेकर स्पष्ट जवाब दे और यह बताए कि इनका आधार क्या है।
राज ठाकरे के बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग शुरू कर दी है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले उठाया गया यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
इस बीच, प्रशासन का कहना है कि चुनाव आयोग के सभी फैसले संवैधानिक दायरे में रहकर लिए जाते हैं और उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष चुनाव कराना होता है। हालांकि, राज ठाकरे के आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया और नियमों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर अब सभी की नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।