गाजियाबाद: गुरू तेग बहादुर का शहीदी दिवस आज, कविनगर के एक गुरुद्वारे में कीर्तन में शामिल हुए लोग

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गाजियाबाद: गुरू तेग बहादुर का शहीदी दिवस आज, कविनगर के गुरुद्वारे में श्रद्धा और भक्ति से भरा कीर्तन

गाजियाबाद में आज सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कविनगर स्थित एक गुरुद्वारे में सुबह से ही संगत का भारी उत्साह देखने को मिला।

गुरुद्वारे के मुख्य हॉल में कीर्तन दरबार सजाया गया, जहाँ रागी जत्थों ने “जो बोले सो निहाल” और “वाहे गुरु सिमरिए” जैसे पवित्र शब्दों का गायन कर माहौल को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।

संगत ने गुरु तेग बहादुर जी की भगत-भावना, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च बलिदान को याद किया। संगत में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी संख्या मौजूद रही।

गुरुद्वारा प्रबंधन ने बताया कि आज का दिन इंसानियत, भाईचारे और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्रेरणादायक है, क्योंकि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने प्राण हिंदु धर्म और मानव अधिकारों की रक्षा में न्यौछावर किए थे।

कार्यक्रम के बाद लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

गाजियाबाद। आज का दिन आध्यात्मिकता, त्याग और मानवता को समर्पित रहा, जब पूरे देश के साथ गाजियाबाद में भी सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शहीदी दिवस अत्यंत श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाया गया।

कविनगर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में सुबह से ही संगतों का आना शुरू हो गया था। गुरुद्वारे के प्रांगण में सजा विशेष कीर्तन दरबार, पूरे वातावरण को ‘वाहे गुरु’ के अमृतमय स्वर से भर गया।


✨ कीर्तन दरबार—भक्ति और शांति का दिव्य संगम

गुरुद्वारे के मुख्य दरबार हॉल में रागी जत्थों ने गुरु साहिब की वाणी का कीर्तन किया। “जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल” के जयकारों ने कार्यक्रम में ऊर्जा और आस्था का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया।

कई श्रद्धालुओं ने गुरु तेग बहादुर जी के त्याग को याद करते हुए कहा कि
“गुरु साहिब ने मानवता, धर्म और सत्य की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर इतिहास में अद्वितीय मिसाल कायम की।”

महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने कीर्तन में पूर्ण समर्पण भाव से भाग लिया, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक उत्साह का अनोखा प्रवाह देखने को मिला।


🕯 गुरु तेग बहादुर जी का संदेश—त्याग, स्वतंत्रता और मानवता का प्रतीक

कार्यक्रम के दौरान ज्ञानी ने गुरु साहिब के जीवन के प्रमुख सिद्धांतों और उनके द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान पर विस्तृत चर्चा की।

उन्होंने कहा कि आज का दिन हमें तीन बड़ी सीख देता है:

  • धर्म और मानवता की रक्षा सर्वोपरि है

  • सत्य के लिए खड़ा होना ही असली साहस है

  • धर्म में किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं—सबको समान स्वतंत्रता मिले


🍲 विशाल लंगर—सेवा की मिसाल

कार्यक्रम के समापन के बाद गुरुद्वारे में विशाल लंगर का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रेम और समानता के भाव से भोजन ग्रहण किया।

सेवादारों द्वारा भोजन परोसने से लेकर सफाई तक, हर सेवा गुरु परंपरा के अनुरूप पूरी समर्पणता के साथ निभाई गई।

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