महाराष्ट्र के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य में 2007 और 2023 के बीच भेड़ियों की आबादी में 41% से अधिक की गिरावट आई है। यानी हर साल 3.1% की दर से इनकी आबादी कम हो रही है।

दुनिया की सबसे प्राचीन और दुर्लभ भेड़िया प्रजाति में शामिल कैनिस ल्यूपस पैलिप्स विलुप्त होने के कगार पर है। इस भारतीय भेड़िए की संख्या जंगलों में तीन हजार के करीब ही बची है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे आधिकारिक तौर संकटग्रस्त मानकर अपनी लाल सूची में शामिल कर लिया है।
महाराष्ट्र के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य में 2007 और 2023 के बीच भेड़ियों की आबादी में 41% से अधिक की गिरावट आई है। यानी हर साल 3.1% की दर से इनकी आबादी कम हो रही है। अध्ययन में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के डॉ. देशभर के कई वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने डब्ल्यूआईआई के पूर्व डीन डॉ. यादवेंद्रदेव विक्रमसिंह झाला के साथ मिलकर काम किया। राइस विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ. लॉरेन हेनेली भी इसमें सह-सहयोगी थीं।
इन्सानों के साथ संघर्ष और घटते आवास प्रमुख वजह
आईयूसीएन के आकलन के मुताबिक, आवास घटने, इंसानों के साथ संघर्ष, बीमारी और जंगली कुत्तों के साथ संकरण के कारण पिछली तीन पीढ़ियों में भेड़ियों की संख्या में गिरावट आई है। डॉ. खान कहते हैं कि आवास का नुकसान और संकरण सबसे बड़े खतरे हैं। कुत्ते-भेड़िया संकरण वास्तविक भेड़ियों की आबादी को सीधे प्रभावित कर रहा है, और हम आनुवंशिक रूप से शुद्ध भेड़ियों में लगातार गिरावट देख रहे हैं।
Author: planetnewsindia
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