Avoid these Mistakes On Dussehra: दशहरे के दिन किए गए शुभ कार्यों का जीवन पर सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। लेकिन कुछ सी बातें भी होती हैं जिन्हें इस दिन करने से अशुभ फल मिल सकते हैं। आइए जानते हैं वे कौन-से 5 काम हैं जिन्हें दशहरे के दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
Dussehra dos and don’ts : बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा इस बार 02 अक्तूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। इसे विजयादशमी भी कहा जाता है, और यह पर्व सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। इसलिए इस दिन को केवल एक उत्सव ही नहीं, बल्कि धर्म, साहस और सत्य की जीत का उत्सव माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि दशहरे के दिन किए गए शुभ कार्यों का जीवन पर सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। लेकिन इसके विपरीत, कुछ ऐसी बातें भी होती हैं जिन्हें इस दिन करने से अशुभ फल मिल सकते हैं। परंपराओं के अनुसार यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए और कुछ खास गलतियों से बचा जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग खुल सकता है। तो आइए जानते हैं वे कौन-से 5 काम हैं जिन्हें दशहरे के दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

झूठ और छल से दूर रहें
दशहरा सत्य और धर्म का पर्व है, इसलिए इस दिन झूठ बोलना या किसी को धोखा देना बिल्कुल सही नहीं होता। ऐसा करने से जीवन में अविश्वास और परेशानियां बढ़ती हैं। यह दिन हमें सिखाता है कि सत्य की ही हमेशा जीत होती है, इसलिए इस मौके पर हमेशा सच का ही साथ दें।

प्रकृति और पेड़-पौधों का सम्मान करें
दशहरा केवल बुराई पर अच्छाई की जीत नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवन के संतुलन का भी त्योहार है। इसलिए इस दिन पेड़ों को काटना या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है। आप इस दिन नए पौधे लगाएं और प्रकृति के प्रति सम्मान दिखाएं।

गुस्सा और वाद-विवाद से बचें
दशहरे के दिन क्रोध करना या किसी से लड़ाई-झगड़ा करना रिश्तों में दरार पैदा कर सकता है। गुस्सा और कठोर बातें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं। इसलिए इस दिन शांत और सौम्य स्वभाव बनाए रखें ताकि परिवार और मित्रों के साथ खुशहाली बनी रहे।

परनिंदा और अपमान से बचें
दूसरों की बुराई करना या किसी का अपमान करना इस पवित्र दिन के लिए बिलकुल भी उचित नहीं है। दशहरा का मतलब है सम्मान और सद्भाव। इसलिए सभी के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखें।

दशहरा नए संकल्प लेने और सकारात्मक शुरुआत करने का दिन होता है। इसलिए इस दिन आलस्य करने या समय गंवाने से बचें। अपने कामों को सही समय पर करें और जीवन में प्रगति के लिए सक्रिय रहें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।