Anurag Kashyap: वो निर्देशक जिसने स्थापित किए फिल्म मेकिंग के नए आयाम, लेखन और अभिनय में भी कमाया नाम

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सार

Anurag Kashyap Birthday: हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्माता-निर्देशकों में शुमार अनुराग कश्यप का आज 53वां जन्मदिन है। इस मौके पर जानते हैं कैसे शुरू हुआ उनका सफर।

Anurag Kashyap: A Master of Indian Cinema - FilmInk

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे सितारे हुए हैं जिन्होंने अपने काम से लोगों का नजरिया बदल दिया और हिंदी सिनेमा को एक नया आयाम हासिल कराया है। हालांकि, इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा और कई चुनौतियों को भी पार करना पड़ा। लेकिन वो कहते हैं न कि ‘हार कर जीतने वाले को ही बाजीगर कहते हैं।’ ऐसा ही एक बाजीगर एक बागी भारतीय सिनेमा को भी मिला, जिसने फिल्मों को लेकर लोगों का नजरिया और सोच ही बदल दी। अपनी फिल्मों में इस बागी ने इस कदर बगावत दिखाई कि अपनी ही इंडस्ट्री के कई लोग उसके खिलाफ खड़े हो गए। लेकिन इस कलाकार ने अपनी कला से समझौता नहीं किया और अपनी सोच को नहीं बदला। यही कारण है कि आज इसे हिंदी सिनेमा का एक दूरदर्शी और दिग्गज निर्माता, निर्देशक माना जाता है। आप समझ ही गए होंगे कि हम बात कर रहे हैं अनुराग कश्यप की।


बॉलीवुड का सबसे विवादित निर्देशक, जिसकी पहली फिल्म ही सेंसर बोर्ड ने बैन कर दी, लेकिन आज उसकी गिनती हिंदी सिनेमा के चुनिंदा फिल्ममेकर्स में होती है। आज उसकी फिल्मों का इंतजार किया जाता है और उसकी फिल्में न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी सम्मान और अवॉर्ड हासिल करती हैं। 10 सितंबर 1972 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे अनुराग कश्यप का यहां तक पहुंचने का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। कभी फुटपाथों पर, सड़कों पर, सिग्नल पर भूखे पेट सोने से लेकर मोबाइल से फिल्म रिकॉर्ड करने तक अनुराग कश्यप ने अपने शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष किया है।
लेकिन उस दौर में भी अनुराग ने अपनी कला और अपनी सोच से समझौता नहीं किया। अपनी जिद पर अड़े रहे और आज उसी जिद ने उन्हें भारत के स्वतंत्र सिनेमा का पैरोकार बना दिया है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘गुलाल’, ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘देव डी’ और ‘मुक्काबाज’ जैसी फिल्मों में अनुराग कश्यप ने समाज की सच्चाइयां दिखाई हैं। बतौर राइटर अपना करियर शुरू करने वाले अनुराग कश्यप ने निर्माता-निर्देशक के अलावा फिल्मों के संवाद भी लिखे हैं और अब फिल्मों में अभिनेता के तौर पर भी नजर आ रहे हैं। आज जन्मदिन के मौके पर जानते हैं अनुराग कश्यप के संघर्ष से लेकर लेखक, संवाद लेखक और निर्माता-निर्देशक से लेकर अभिनेता बनने तक के सफर के बारे में।
 

Anurag Kashyap Birthday Director Producer Writer Gangs Of Wasseypur To Bandar Set New Standard Of Film Making
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कॉलेज के दौरान नुक्कड़ नाटक से जुड़े
गोरखपुर में जन्मे अनुराग कश्यप ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन की। ग्रेजुएशन के दौरान अनुराग नुक्कड़ नाटक से जुड़ गए और कई नाटकों में हिस्सा लिया। इसी दौरान उन्होंने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में फिल्में देखीं। इस दौरान 10 दिनों में उन्होंने 55 फिल्में देख डालीं और विटोरियो डी सिका की ‘बाइसिकल थीव्स’ ने उन्हें काफी प्रभावित किया।

5 हजार रुपए लेकर पहुंचे मुंबई
साल 1993 में अनुराग कश्यप जेब में 5 हजार रुपए लेकर मुंबई पहुंच गए और काम की तलाश में भटकने लगे। हालांकि, उन्हें इतनी जल्दी काम नहीं मिला और उनके पैसे भी खत्म हो गए। इसके बाद उन्होंने कई महीने सड़कों पर, फुटपाथ पर और सिग्नल पर सोकर बिताए। फिर वह पृथ्वी थिएटर में काम पाने में कामयाब रहे, लेकिन उनका पहला नाटक अधूरा रह गया क्योंकि निर्देशक की मृत्यु हो गई। हालांकि, इस दौरान वो मनोज बाजपेयी, तिग्मांशु धूलिया और अनुभव सिन्हा जैसे लोगों के संपर्क में आए और धीरे-धीरे इनसे दोस्ती शुरू हुई।

श्रीराम राघवन और हंसल मेहता के लिए लिखीं कहानी, लेकिन नहीं हो सकी रिलीज
1995 में एक परिचित ने अनुराग का परिचय शिवम नायर से कराया। जिस दिन वे मिले कश्यप ने नायर के घर पर ‘टैक्सी ड्राइवर’ देखी और इस फिल्म ने उन्हें कुछ लिखने के लिए प्रेरित किया। उस वक्त श्रीराम राघवन, श्रीधर राघवन और शिव सुब्रमण्यम की टीम दो प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थी, जिनमें से एक सीरियल किलर ऑटो शंकर के जीवन पर आधारित एक शॉर्ट टीवी सीरीज ‘ऑटो नारायण’ थी। दूसरी अनुराग कश्यप द्वारा लिखित एक फिल्म थी। ‘ऑटो नारायण’ में देरी हुई क्योंकि सुब्रमण्यम द्वारा लिखी गई स्क्रिप्ट पसंद नहीं आ रही थी। इसके बाद अनुराग ने इस स्क्रिप्ट को फिर से लिखा और उन्हें इसका क्रेडिट भी मिला। लेकिन इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद 1997 में उन्होंने हंसल मेहता की पहली फिल्म ‘जयते’ की स्क्रिप्ट लिखी, जो सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो पाई। इसके अलावा टीवी श्रृंखला ‘कभी-कभी’ के एपिसोड भी लिखे।

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मनोज बाजपेयी की सिफारिश पर मिली ‘सत्या’
साल 1998 में अनुराग कश्यप को एक बड़ी सफलता मिली, जब उनके हाथ लगी राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या’। अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राम गोपाल वर्मा को अनुराग कश्यप का नाम स्क्रिप्ट राइटिंग के लिए सुझाया। इसके बाद अनुराग ने सौरभ शुक्ला के साथ मिलकर ‘सत्या’ की कहानी लिखी। क्राइम एक्शन थ्रिलर ‘सत्या’ बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और बॉलीवुड की कल्ट फिल्म बन गई। इस फिल्म से अनुराग कश्यप को भी पहचान मिली। इसके बाद अनुराग ने रामू के साथ ‘कौन’ की स्क्रिप्ट और ‘शूल’ के डायलॉग लिखे। 1999 में अनुराग ने टेलीविजन के लिए ‘लास्ट ट्रेन टू महाकाली’ नाम की एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई। ‘सत्या’ के बाद अनुराग कश्यप ने कई फिल्मों की कहानी और डायलॉग लिखे हैं। इनमें ‘जंग’, ‘नायक’, ‘युवा’ ‘हनीमून ट्रैवेल्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘गोल’, ‘मैं ऐसा ही हूं’, ‘शाकालाका बूम बूम’ और ‘कुर्बान’ शामिल हैं।

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पहली निर्देशित फिल्म ‘पांच’ कभी नहीं हो सकी रिलीज
‘सत्या’ की सफलता ने अनुराग को बतौर लेखक तो स्थापित कर दिया। ‘सत्या’ के बाद अनुराग ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और एक बैंड के पांच दोस्तों की कहानी लिखी, जो बाद में क्रिमिनल बन जाते हैं। इस फिल्म का नाम था ‘पांच’। हालांकि, फिल्म में अधिक वॉयलेंस और गालियां होने के चलते सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पास करने से साफ इनकार कर दिया और इस पर बैन लगा दिया। बोर्ड ने फिल्म में कई बदलाव करने की मांग की, जिन्हें अनुराग ने मानने से मना कर दिया, क्योंकि अनुराग अपने आर्टिस्टिक विजन और कहानी से कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हालांकि, 2001 में फिल्म को सेंसर बोर्ड ने कुछ एक कट्स के साथ पास कर दिया। लेकिन प्रोड्यूसर की कुछ परेशानियों के चलते फिल्म कभी भी सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो पाई। ये फिल्म यूट्यूब पर मौजूद है। जहां फिल्म को काफी सराहना मिली और इसे अन्य देशों में भी काफी पसंद किया गया।

दूसरी फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ भी अटकी, बाद में दीं कई यादगार फिल्में
इस दौरान अनुराग बतौर लेखक काम करते रहे और स्क्रिप्ट व डायलॉग लिखते रहे। फिर साल 2004 में अनुराग अपनी दूसरी फिल्म लाए ‘ब्लैक फ्राइडे’। यह फिल्म 1993 के बॉम्बे बम विस्फोटों के बारे में हुसैन जैदी की इसी नाम की किताब पर आधारित थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बम विस्फोट मामले में फैसला सुनाए जाने तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी। बाद में फिल्म को 2007 में सेंसरशिप की मंजूरी मिली और दो साल बाद इसे रिलीज किया गया। इस फिल्म को समीक्षकों ने काफी सराहा और इसे अब बॉलीवुड की अंडररेटेड फिल्मों में गिना जाता है। इसके बाद अनुराग ने ‘नो स्मोकिंग’ (2006), ‘मुंबई कटिंग’ (2008), ‘देव डी’ (2009), ‘गुलाल’ (2009) और ‘द गर्ल इन येलो बूट्स’ (2011) का निर्देशन किया। इनमें  ‘देव डी’ और ‘गुलाल’ बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रहीं और समीक्षकों ने भी फिल्मों की जमकर तारीफ की। ‘गुलाल’ को आज भी हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म माना जाता है। छात्र राजनीति पर आधारित इस फिल्म को कई फिल्म मेकिंग स्कूलों में भी दिखाया जाता है।

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‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने अनुराग को बनाया दिग्गज निर्देशक
साल 2012 में अनुराग कश्यप एक ऐसी फिल्म लेकर आए जिसने भारतीय सिनेमा के मायने ही बदल दिए। इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में नए आयाम स्थापित किए साथ ही बॉलीवुड को कई बेहतरीन कलाकार भी दिए। हम बात कर रहे हैं अनुराग कश्यप की ऑल टाइम कल्ट क्लासिक फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की। यह फिल्म दो पार्ट्स में रिलीज हुई थी। धनबाद के कोयला माफिया की कहानी बताती यह फिल्म एक एक्शन-थ्रिलर फिल्म थी। कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सराही गई यह फिल्म बॉलीवुड की पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें इस कदर की हिंसा, गालियां और रॉ चीजें दिखाई गई थीं। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उस वक्त उतनी सफलता नहीं मिली।
लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह फिल्म लोगों के बीच इतनी लोकप्रिय हुई और इसे इतना पसंद किया गया कि आज इसकी गिनती भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में होती है जिन्होंने भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया है और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। आज इस फिल्म के डायलॉग और सीन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा बन गए हैं। फिर वो चाहें ‘हजरात-हजरात’ हो, ‘सब रामाधीर के आदमी हैं’ हो, ‘बेटा तुमसे न हो पाएगा’ हो, ‘परमिशन लेनी पड़ेगी’ हो या फिर ‘बाप का दादा का.. सबका बदला लेगा तेरा फैजल’ हो।
इस फिल्म की सफलता ने अनुराग कश्यप को बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों में लाकर खड़ा कर दिया। इसके बाद अनुराग कश्यप की निर्देशित फिल्मों का लोग बेसब्री से इंतजार करने लगे। बाद में उन्होंने ‘बॉम्बे टॉकीज’, ‘अग्ली’, ‘बॉम्बे वेलवेट’, ‘रमन राघव 2.0’, ‘मुक्काबाज’, ‘मनमर्जियां’, ‘चोक्ड’, ‘दोबारा’ और ‘आलमोस्ट प्यार विद डीजे मोहब्बत’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इस दौरान उन्होंने नेटफ्लिक्स की पहली भारतीय सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ का भी सह-निर्देशन किया है।

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Author: admln