2019 में जून से अगस्त के बीच 5,341 मौतें हुईं, जो 2022-2024 के दौरान बढ़कर 11,819 हो गईं। जून, जिसे सबसे चरम यूटीसीआई भी माना जाता है, इसमें हर साल लगातार सबसे ज्यादा मौतें दर्ज होती हैं। टीम ने बताया कि 2023 के लैंसेट काउंटडाउन के आंकड़े बताते हैं कि 2000-2004 की तुलना में 2018-2022 के दौरान 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में गर्मी से संबंधित मौतों में 85% की वृद्धि हुई है।
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दिल्ली में जून, जुलाई और अगस्त में मौतों में वृद्धि हो रही है। यह 12 वर्षों से जारी है। ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट में इसका कारण बढ़ते तापमान में लंबे समय तक रहना बताया गया है। मृत्यु और गंभीरता शीर्षक वाली यह रिपोर्ट शहर में अत्यधिक गर्मी और मृत्यु दर के बीच स्पष्ट संबंध को उजागर करती है।
शोधकर्ताओं ने वर्ष 2015-2024 के रुझानों का अध्ययन करके पाया कि जून से सितंबर तक यूनिवर्सल थर्मल क्लाइमेट इंडेक्स (यूटीसीआई) के उच्च मान लगातार दर्ज होते हैं, जो यह मापता है कि शरीर बाहरी गर्मी को कैसे महसूस करता है, जबकि इन महीनों में हवा का तापमान चरम पर नहीं होता है। जुलाई और अगस्त अब अत्यधिक गर्मी के महीनों की तरह दमनकारी लगते हैं, जो एक खतरनाक बदलाव का संकेत है। अत्यधिक गर्मी की अवधि मानसून के मौसम तक बढ़ रही। शोधकर्ताओं ने कहा कि गर्मी के साथ-साथ नमी भी शहर में खतरनाक तापीय परिस्थितियों को जन्म दे सकती है।
इसके अलावा टीम ने पाया कि मौतों में वृद्धि का रुझान एक अन्य डाटासेट से भी चिंताजनक रूप से मेल खाता है। शहर में अज्ञात मौतें, जो अक्सर सबसे हाशिए पर पड़े लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं। 2019 में जून से अगस्त के बीच 5,341 मौतें हुईं, जो 2022-2024 के दौरान बढ़कर 11,819 हो गईं। जून, जिसे सबसे चरम यूटीसीआई भी माना जाता है, इसमें हर साल लगातार सबसे ज्यादा मौतें दर्ज होती हैं। टीम ने बताया कि 2023 के लैंसेट काउंटडाउन के आंकड़े बताते हैं कि 2000-2004 की तुलना में 2018-2022 के दौरान 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में गर्मी से संबंधित मौतों में 85% की वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 2 डिग्री सेल्सियस की वैश्विक तापमान वृद्धि गर्मी से संबंधित मौतों में 370 प्रतिशत की वृद्धि से संबंधित है।
लू से बेघर 192 लोगों की जान गई
रिपोर्ट में पाया कि 2024 में 11 से 19 जून तक हीट स्ट्रोक से रिकॉर्ड बेघर 192 लोगों की मौत हुई। यह 2 दशकों में सबसे अधिक है। टीम ने कहा कि ये आंकड़े शहर के सबसे कमजोर लोगों को तीव्र गर्मी से बचाने में व्यवस्थागत विफलता को दर्शाते हैं। शोध टीम ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, 2022 के आंकड़ों का हवाला दिया, जिससे पता चला कि हाल के वर्षों में 9% से अधिक मौतें हीट या सन स्ट्रोक से जुड़ी हैं। अधिकतर पीड़ित 30-60 वर्ष के हैं।