बुंदी जिले की देईखेड़ा पुलिस ने पंचायत सचिव से मारपीट कर फरार हुए दो मुख्य आरोपियों को घटना के एक सप्ताह बाद गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को सुरक्षा घेरे में कस्बे के मुख्य बाजार से पैदल जुलूस के रूप में घुमाया, ताकि आमजन का भय समाप्त हो सके।

घटना और रिपोर्ट
26 अगस्त को रेबारपुरा पंचायत सचिव ओ.पी. नामा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि जब वे बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचा रहे थे, तभी प्रतापगढ़ पुलिया के पास 5–6 लोगों ने उन्हें रोक लिया। आरोपियों ने राहत सामग्री छीनी और लात-घूंसों से मारपीट की। मौके पर भीड़ जुटने पर आरोपी फरार हो गए। घटना से राजकार्य बाधित हुआ था।
पुलिस कार्रवाई
जिला पुलिस अधीक्षक राजेंद्र मीणा के निर्देश पर, लाखेरी सीओ नरेंद्र नागर और देईखेड़ा थाना प्रभारी (कार्यवाहक) कन्हैयालाल मीणा की अगुवाई में टीम गठित की गई। मुखबिर की सूचना पर बुधवार सुबह इंदरगढ़ क्षेत्र में दबिश देकर मुख्य आरोपी प्रहलाद गुर्जर (40) और पप्पूलाल मीणा (40), निवासी छप्पनपुरा को गिरफ्तार किया गया।
थाना प्रभारी के अनुसार, घटना के बाद आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहे थे—लाखेरी, उतराना, इंदरगढ़ के केमला और कोटड़ी जैसे इलाकों में छिपकर रह रहे थे और हर रात शराब पार्टी भी करते थे। करीब एक सप्ताह तक फरारी के बाद पुलिस दबिश के दौरान वे पकड़ में आए। दोनों को गुरुवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
प्रभाव और राहत
घटना से नाराज पंचायत सचिव संघ (केशवरायपाटन) ने घोषणा की थी कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, वे जिला प्रशासन द्वारा संचालित बाढ़ राहत शिविरों का बहिष्कार करेंगे। अब गिरफ्तारी के बाद शिविरों के सुचारू संचालन की संभावना है।