डिंडोरी। जिले में शराब कारोबार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि जिन दुकानों को वैध रूप से शराब बेचने का लाइसेंस मिला है, वहीं से अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाइसेंसधारी संचालक निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत वसूल रहे हैं और विरोध करने पर ग्राहकों को साफ शब्दों में कहा जाता है—“नहीं लेना है तो मत लो।”

तय कीमत से अधिक वसूली
जानकारी के अनुसार, जिले की कई दुकानों पर शराब बोतलों को तय रेट से 30-40 रुपये अधिक पर बेचा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, 120 रुपये कीमत वाली बोतल 150 से 160 रुपये तक में मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां बिना बिल के अवैध शराब की आपूर्ति खुलेआम की जा रही है।
मिलीभगत के आरोप
सूत्रों के मुताबिक यह गोरखधंधा केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है। इसमें कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। यही कारण है कि लंबे समय से शिकायतें आने के बावजूद अब तक किसी दुकान पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन
विशेषज्ञों का कहना है कि शराब की तय कीमत से अधिक वसूली न केवल उपभोक्ता अधिकारों का हनन है, बल्कि यह लाइसेंस की शर्तों का भी सीधा उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संचालकों का लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए और भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
जनता की नाराज़गी
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग इस स्थिति से परेशान हैं। महंगी शराब खरीदने से उनकी जेब पर बोझ बढ़ रहा है, जबकि सस्ती अवैध शराब उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और आबकारी विभाग पर टिकी हैं। नागरिकों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करने को मजबूर होंगे।
बड़ा सवाल
कुल मिलाकर, डिंडोरी जिले में लाइसेंसी दुकानों से अवैध शराब कारोबार का मामला व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन जिम्मेदारी निभाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह खेल पहले की तरह ही चलता रहेगा।