मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की मुंबई में भूख हड़ताल शुरू हो गई है। मनोज जरांगे शुक्रवार सुबह मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे, जहां मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जरांगे और उनके समर्थक एक दिवसीय भूख हड़ताल कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। जहां एक ओर आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई में अपनी भूख हड़ताल शुरू कर दी है। वहीं ओबीसी समुदाय इससे नाराज है। ओबीसी समुदाय के नेता लक्ष्मण हाके ने मनोज जरांगे की मांगो को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगे मान ली गईं तो यह ओबीसी वर्ग के ही हिस्से में आएंगी ऐसे में हम भी अपना आंदोलन शुरू करेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने विपक्षी नेताओं शरद पवार, उद्धव ठाकरे पर जरांगे को शह देने का भी आरोप लगाया। लक्ष्मण हाके ने कहा कि जरांगे तो सिर्फ एक चिंगारी थे, लेकिन विपक्षी नेता शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कुछ मंत्रियों ने उन्हें ज्वालामुखी बना दिया।

सभी दलों के विधायक-सांसद जरांगे का समर्थन कर रहे
हाके ने आरोप लगाया कि सभी दलों के विधायक-सांसद जरांगे का समर्थन कर रहे हैं और संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। हाके ने कहा कि सिर्फ पांच से दस प्रतिशत मराठा मुंबई में प्रदर्शन के लिए पहुंचे हैं, जबकि ओबीसी आबादी 50 प्रतिशत है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार इस मुद्दे पर सीएम फडणवीस को मुश्किल में डाल रहे हैं क्योंकि उनके विधायक जरांगे के साथ खड़े हैं।

इससे पहले, बीड जिले में एनसीपी विधायक विजयसिंह पंडित के समर्थकों से झड़प के बाद हाके और उनके 13 समर्थकों पर दंगा और गैरकानूनी जमावड़े का मामला दर्ज किया गया था। इसे लेकर हाके ने कहा कि हम संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन सरकार हमारे साथ भेदभाव कर रही है। किसी गांव में अपराध होता है तो सबसे पहले ओबीसी लोगों को ही हिरासत में लिया जाता है।

सरकार तुरंत मनोज जरांगे से संवाद करे- उद्धव ठाकरे
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे से तुरंत संवाद करना चाहिए और समुदाय को न्याय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का सम्मानजनक समाधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी न तो आतंकवादी हैं और न ही ‘दंगा’ करने आए हैं, बल्कि वे न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठा समाज को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी सरकार की है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि मराठा समाज को पहले भी झूठे वादों से ठगा गया और उनकी समस्याएं अब तक अनसुलझी हैं। हालांकि, उन्होंने खुद का रुख इस मुद्दे पर स्पष्ट नहीं किया।
उद्धव ने डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब वे ढाई साल मुख्यमंत्री रहे तो मराठा समाज को न्याय क्यों नहीं दिया गया।

43 वर्षीय जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। जरांगे ने कहा है कि उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे और गणेश उत्सव में कोई बाधा नहीं डालेंगे। जरांगे की मांग है कि सभी मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी एक कृषक वर्ग से जुड़ी जाति है, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है। जिससे उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का फायदा मिलेगा।
जालना पुलिस ने जरांगे और उनके समर्थकों पर 40 शर्तें लगाने के बाद उन्हें मार्च जारी रखने की अनुमति दी थी, जिसमें उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वाहनों की आवाजाही में बाधा न डालने और आपत्तिजनक नारे लगाने से बचने का निर्देश दिया गया। मुंबई पुलिस ने जरांगे को 29 अगस्त को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच आजाद मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने

पुलिस ने यह भी शर्त रखी है कि प्रदर्शनकारियों के केवल पांच वाहन ही आजाद मैदान जा सकते हैं और वहां प्रदर्शनकारियों की संख्या 5,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में 1500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। जरांगे के समर्थकों को ध्यान में रखते हुए रेलवे पुलिस ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर भी सुरक्षा बढ़ा दी है।