Dhyan Chand Bharat Ratna: भारत रत्न से अब तक वंचित मेजर ध्यानचंद, बरसों से जारी इंतजार; बार-बार हो रही अनदेखी

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2021 में केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ का नाम बदलकर ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ कर दिया, लेकिन भारत रत्न के मामले में सरकार ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है।

Major Dhyan Chand Still Awaits Bharat Ratna: Decades of Neglect Despite Unmatched Legacy

विस्तार

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त), राष्ट्रीय खेल सम्मान और देशभर में कई स्टेडियम मौजूद हैं। इसके बावजूद भारत रत्न की उपाधि उनसे अब तक कोसों दूर है। तमाम आंदोलनों, आरटीआई और अपीलों के बावजूद यह सवाल उठता है कि आखिर ध्यानचंद को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया।

खेल रत्न का नाम बदला, लेकिन भारत रत्न पर खामोशी
2021 में केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ का नाम बदलकर ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ कर दिया, लेकिन भारत रत्न के मामले में सरकार ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है।
दिलीप टिर्की का आंदोलन भी नाकाम
हॉकी इंडिया अध्यक्ष और तीन बार के ओलंपियन दिलीप टिर्की ने 2016 में जंतर-मंतर पर आंदोलन की अगुआई की थी। यहां तक कि उन्होंने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया। टिर्की का कहना था, ‘ध्यानचंद अपने दौर के सबसे बड़े खिलाड़ी थे। भारत को पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक हॉकी से मिला और उनका योगदान अतुलनीय है। जब उनके नाम से खेल रत्न और स्टेडियम हो सकते हैं, तो भारत रत्न क्यों नहीं?’
ओलंपिक में भारत का स्वर्ण युग
ध्यानचंद लगातार तीन ओलंपिक (1928, 1932 और 1936) में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में सूत्रधार रहे। उन्होंने भारत को विश्व खेल मानचित्र पर स्थापित किया। उनके नाम 185 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 570 गोल का बेमिसाल रिकॉर्ड दर्ज है।
बेटे अशोक ध्यानचंद का बयान
ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद, जो 1975 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रहे, कहते हैं, ‘पिताजी ने कभी प्रचार नहीं किया। 46 साल बाद भी उनका नाम गूंज रहा है। यही सच्चे महान खिलाड़ी की पहचान है।’ उन्होंने बताया कि ध्यानचंद ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कभी अपने लिए पुरस्कार या सुविधा नहीं मांगी। यहां तक कि गैस एजेंसी के लिए दस्तखत करने से भी इनकार कर दिया।
पद्मभूषण मिला, लेकिन भारत रत्न से दूर
1956 में ध्यानचंद को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया, लेकिन भारत रत्न के लिए लगातार अनदेखी हुई। 2013 में सचिन तेंदुलकर पहले और अब तक के एकमात्र खिलाड़ी बने जिन्हें यह सम्मान दिया गया।
Major Dhyan Chand Still Awaits Bharat Ratna: Decades of Neglect Despite Unmatched Legacy
कई बार उठी मांग, लेकिन नतीजा शून्य
2016 में जंतर मंतर आंदोलन में कई ओलंपियन शामिल हुए। सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने भी ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग पर रेत की कला बनाई। टिर्की ने संसद में ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। 2013 में बिशन सिंह बेदी की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन खेल मंत्री से मिला। 2014 में गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में बताया कि ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की गई है, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इंतजार खत्म होगा या जारी रहेगा?
पिछले एक दशक में अटल बिहारी वाजपेयी, पंडित मदन मोहन मालवीय, प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका, नानाजी देशमुख, कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी, पी.वी. नरसिंहराव, चौधरी चरण सिंह और एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न से नवाजा गया, लेकिन ध्यानचंद अब भी इंतजार में हैं। इतने प्रयासों और अपीलों के बावजूद मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं मिला। सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में भारत सरकार इस महान खिलाड़ी की निस्वार्थ सेवा को याद करते हुए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देगी या हॉकीप्रेमियों का इंतजार यूं ही जारी रहेगा।
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Author: SADAF NEWSINDIA

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