स्यानाचट्टी में बनी अस्थाई झील के मुहाने के खुलने से जल निकासी तेजी से हो रही है।
पानी यमुना नदी पर बने पुल से लगभग चार फीट नीचे बह रहा है। नदी से गाद निकलने और पुल से मलबा हटाने तथा आवाजाही सुचारू करने के लिए जेसीबी और पोकलेन से कार्य जारी है।

उत्तरकाशी में स्यानाचट्टी में झील में पानी का जलस्तर कम हुआ है। शासन-प्रशासन और जनता के लिए राहत की खबर है। बडकोट में यमुनोत्री धाम सहित आसपास अतिवृष्टि के कारण यमुना नदी ने रौद्र रूप ले लिया था।
यमुनोत्री धाम से यमुना नदी अपने रौद्र रूप के साथ आगे बढ़ती चली गई। कुदरत की महिमा के चलते सिस्टम ने राहत की सांस ली है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने एन एच के अधिकारियों के साथ शनिवार को स्यानाचट्टी से आगे यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने मार्ग पर भूधंसाव और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर संबंधित विभागों को सभी जरूरी इंतेज़ाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्यानाचट्टी से आगे जंगल चट्टी में मार्ग का लगभग 200 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से यातायात बाधित होने की जानकारी पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य मौके पर पहुंचे।
इस दौरान जिलाधिकारी मार्ग से मलबा हटाने और वायरक्रेट के माध्यम से सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर जल्द से जल्द आवाजाही हेतु सुचारू करने के निर्देश दिए। क्षतिग्रस्त मार्ग को आवाजाही के लिए सुचारू बनाने के लिए मौके पर एक पोकलेन एवं एक जेसीबी तैनात है। जिलाधिकारी ने जरूरत पड़ने पर मशीनों और श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर मार्ग जल्द से जल्द खोलने के निर्देश दिये।ईई मनोज रावत ने कहा कि कम से कम यहां पर दो दिन बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है।
स्याना चट्टी में बनी अस्थाई झील के खुलने और जल स्तर कम होने से उक्त स्थान पर आवाजाही सुचारू की जा चुकी है। यमुनोत्री राजमार्ग पर चिन्हित स्थानों पर पर्याप्त संख्या में जेसीबी और पोकलेन कार्य कर रही हैं। जनपद में अवरूद्ध मार्गों को आवाजाही के लिए बहाल करने के लिए प्रशासन की सभी टीमें पूरी प्रतिबद्धता से जुटी हैं।