
केलांग (लाहौल-स्पीति)। स्पीति घाटी जैविक (ऑर्गेनिक) सेब और हरे मटर उत्पादन के लिए जानी जाती है। इस बार हरे मटर के दाम गिरने से किसान मायूस हैं। घाटी में मटर सीजन इन दिनों पीक पर है लेकिन सड़कें बार-बार अवरुद्ध होने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। नगदी फसल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही है। लिहाजा, सब्जी कारोबारियों ने मटर के दाम घटा दिए हैं। किसानों ने बताया कि स्पीति के मटर और सेब की खासियत यह है कि इनमें किसी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यही कारण है कि इनकी मंडियों में हमेशा अच्छी मांग रहती है। इस बार सड़कें बार-बार बाधित होने से बाजार तक मटर को पहुंचाना मुश्किल हो गया है। सीजन की शुरुआत में जहां किसानों को हरे मटर के 80 रुपये प्रति किलो तक दाम मिले वहीं अब कीमत घटकर 47 रुपये प्रति किलो तक आ गई है। किसान छेरिंग, रिगजिन, पलजोर और समतन का कहना है कि घाटी के लगभग 80 फीसदी परिवारों की आजीविका खेती और बागवानी पर निर्भर है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज तक का खर्चा कृषि से होने वाली आमदनी से चलता है। इस बार नगदी फसलों के दाम गिरने से किसानों पर संकट खड़ा हो गया है।