बरेली में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सड़क हादसे में घायल हुई आशा कार्यकर्ता सुनीता देवी (36) ने निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद जब उन्हें शव सौंपा गया तो सुनीता देवी के गहने गायब थे। इस संबंध में परिजनों ने सीएमओ से शिकायत दर्ज कराई है।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थीं सुनीता देवी
फतेहगंज पूर्वी के गांव कुंवरपुर दानपुर निवासी सुनीता देवी सोमवार को हादसे में घायल हो गई थीं। निजी एंबुलेंस चालक उन्हें लेकर सीधे राजेंद्रनगर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचा। वहां उनके मोबाइल फोन से कॉल कर परिजनों को सूचना दी गई और उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। भर्ती के समय भेजी गई तस्वीरों में उनके गहने साफ दिख रहे थे।
इलाज के दौरान मौत, गहने नहीं मिले
मंगलवार सुबह इलाज के दौरान सुनीता देवी की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि जब शव उन्हें सौंपा गया तो शरीर से सभी गहने गायब थे। पूछताछ करने पर अस्पताल स्टाफ ने कोई जवाब नहीं दिया और सीसीटीवी फुटेज भी दिखाने से इंकार कर दिया। इसके बाद परिजनों ने सीएमओ से संपर्क कर पूरे मामले की लिखित शिकायत की।
एंबुलेंस पर भी उठे सवाल
सुनीता देवी के भतीजे राजीव कुमार का आरोप है कि हादसे के बाद एंबुलेंस चालक ने पास के अस्पतालों के बजाय करीब 40 किलोमीटर दूर राजेंद्रनगर के निजी अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। उनका कहना है कि यह कमीशन के खेल का हिस्सा हो सकता है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
शिकायत के आधार पर सीएमओ ने मामले की जांच डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अंसारी को सौंपी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज और इलाज से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। साथ ही बुधवार को मौके पर जाकर अस्पताल का निरीक्षण कर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे।