Jalaun News: चिटफंड कंपनी के दो कर्मचारियों को धोखाधड़ी में सात-सात साल की कैद

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Chit Fund News: चिटफंड कंपनियों के 83 डॉयरेक्टर फरार, 88 करोड़ से ज्यादा की  संपत्तियों को ढूंढना टेढ़ी खीर | Patrika News | हिन्दी न्यूज

उरई न्यूज़: चिटफंड घोटाले में दो आरोपियों को सात साल की सजा

उरई में चिटफंड कंपनी के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को अदालत ने दो कर्मचारियों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर साढ़े सात-साढ़े सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, दोनों आरोपियों पर 25 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में बंद हैं।

उरई न्यूज़: चिटफंड कंपनी में निवेश कर फंसे लाखों रुपये

उरई कोतवाली क्षेत्र के कुकरगांव निवासी शरीफ खान ने पुलिस को दी तहरीर में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में कपिल नामक व्यक्ति चिटफंड कंपनी में पॉलिसी जमा करने का काम करता था। पॉलिसी खुलवाने पर कमीशन भी दिया जाता था।

इसी भरोसे पर शरीफ खान ने भी कंपनी में लाखों रुपये फिक्स डिपॉजिट करा दिए थे। बाद में धोखाधड़ी का मामला सामने आया।

उरई न्यूज़: कंपनी संचालकों पर डुप्लीकेट पॉलिसी देने का आरोप

शिकायतकर्ता शरीफ खान ने आरोप लगाया कि चिटफंड कंपनी की देखरेख नई दिल्ली के द्वारिका मोड़ निवासी अमनदीप और मध्य प्रदेश के सहारनपुर निवासी करुणेश शर्मा करते थे। जब उसने अपने जमा किए गए पैसे और पॉलिसी की मांग की, तो आरोपियों ने उसके साथ धोखाधड़ी कर कंपनी की डुप्लीकेट पॉलिसी थमा दी।

उरई न्यूज़: फर्जी पॉलिसी का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

शिकायतकर्ता ने जब कंपनी के हेड ऑफिस में जांच कराई तो पता चला कि दी गई पॉलिसी पूरी तरह फर्जी है और किसी भी तरह से प्रमाणित नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को 2 अगस्त 2016 को कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

उरई न्यूज़: कोर्ट ने सुनाई सजा, कई मामलों में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ 18 अगस्त 2016 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। लंबे समय से चल रही सुनवाई सोमवार को पूरी हुई। इस दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें और गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। आरोपियों के खिलाफ 25 से अधिक मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिनमें से कई में उन्हें पहले भी सजा हो चुकी है।