UP में फर्जी विदेशी पुलिस: नकली वर्दियां, विदेश में फंसे लोगों को लौटाने का झांसा, कौन-कैसे चला रहा था रैकेट?

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उत्तर प्रदेश में फर्जी पुलिस से जुड़ा यह पूरा केस क्या है? इसके तार कहां-कहां तक फैले थे? पुलिस ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया, वे कौन हैं? आरोपी इस पूरी घटना को कब से और कैसे अंजाम दे रहे थे? आइये जानते हैं…

Uttar Pradesh Police International Police and Crime Investigation Bureau case know about scam racket Interpol

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पिछले महीने पुलिस ने एक अवैध दूतावास के मामले में नटवरलाल की गिरफ्तारी की थी। अब इसी कड़ी में एक और फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सामने आया है कि यहां पुलिस ने फर्जी ‘अंतरराष्ट्रीय पुलिस’ का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

क्या है फर्जी पुलिस कार्यालय का केस?
फर्जी पुलिस कार्यालय से जुड़ा यह पूरा खेल उत्तर प्रदेश के नोएडा का है। यहां पुलिस ने रविवार (10 अगस्त) को सेक्टर-70 में छापेमारी के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किया, जो एक किराए के मकान से फर्जी पुलिस दफ्तर चला रहे थे। इस घर में पुलिस दफ्तरों की तरह बोर्ड भी लगा था और इस पर ‘इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो’ लिखा था। हालांकि, छापेमारी में जो सबूत मिले, उनसे सामने आया कि इस तरह का कोई पुलिसबल न तो भारत में वैध तरह से मौजूद है और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे कोई मान्यता मिली है।
गिरफ्तार किए गए लोग कौन हैं?
पुलिस ने इस मामले में जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया है, वे सभी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। इनमें से चार लोग- विभाष चंद्र अधिकारी (27), अराग्य अधिकारी (26), पिंटू पाल, और समापदमल (25) बीरभूम जिले से हैं। वहीं, बाबुल चंद्र मंडल (27) 24 परगना और आशीष कुमार कोलकाता का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, विभाष आर्ट्स में ग्रैजुएट है, वहीं अराग्य कानून की पढ़ाई कर चुका है। इसके अलावा बाकी चार लोग 12वीं पास हैं।

कब से और कैसे चल रहा था यह फर्जीवाड़ा?
पुलिस का कहना है कि चार आरोपियों ने 4 जून को सेक्टर 70 में एक घर किराए पर लिया था। एक हफ्ते के अंदर ही इन लोगों ने इस घर के बाहर कई पोस्टर और संकेतक लगा दिए। इनमें केंद्रीय बलों के अधिकार चिह्नों का भी इस्तेमाल किया गया था, ताकि आम लोगों को यह भारत के सुरक्षाबलों से जुड़े अधिकारियों का दफ्तर ही लगे।

यह गैंग अंतरराष्ट्रीय संस्था- इंटरपोल, यूरेशियन पुलिस और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (आईएचआरसी) के साथ भी अपने कथित संपर्क होने का दावा करता था। आरोपी आम लोगों को यह झांसा देते थे कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर को अपराधों और अपराधियों से निपटने वाले संगठन से हैं। यह लोग अपने आप को एक समानांतर पुलिस संगठन करार देते थे, जो कि आधिकारिक कामों में शामिल रहते थे। यह गैंग बीते दो महीनों से इसी तरह फर्जीवाड़े के जरिए चल रहा था।

एक अधिकारी के मुताबिक, आपराधिक गुट खुद को अंतरराष्ट्रीय पुलिस बताने के साथ दावा करता था कि वह विदेश में फंसे लोगों को भारत लौटाने के साथ वीजा दिलाने और जमीन पर कब्जे को छुड़ाने का भी काम करता है। इसके लिए यह संगठन मदद मांगने वाले लोगों से रकम भी लेता था।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह के लोगों ने खुद को नौकरशाह के तौर पर दर्शाया और खुद पुलिस की तरह कानून से जुड़ा हर काम कराने की भ्रामक जानकारी भी फैलाने लगे। आरोपियों ने अपनी एक वेबसाइट- www.intlpcrib.in भी तैयार की थी, जिसके जरिए ये लोग दान जुटाने का दावा करते थे। इस वेबसाइट पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सर्टिफिकेट लगाए गए थे, ताकि लोगों को यह असली अंतरराष्ट्रीय पुलिस लगे। इन लोगों के पास कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी मोहरें, नकली वर्दियां और फर्जी आईडी कार्ड मौजूद थे, जिनके जरिए यह पीड़ितों से ठगी का काम करते थे।

पुलिस ने कैसे किया पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा?
नोएडा पुलिस के डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी के मुताबिक, पुलिस को इस मामले की जानकारी खुफिया सूत्रों से मिली। पुलिस को पता चला कि कुछ लोग खुद को पुलिस अधिकारी बता रहे हैं और जमीन पर कब्जा छुड़ाने के लिए एक व्यक्ति से समझौता करने में जुटे हैं। इसके बाद पुलिस ने जांच बिठा दी। बाद में सेक्टर-70 में छापेमारी के बाद पुलिस को इस गिरोह से कई फर्जी मोहरें, आईडी कार्ड्स, अलग-अलग मंत्रालयों के प्रमाण पत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज मिले।

पुलिस ने बताया कि जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने आयुष मंत्रालय, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय के कई प्रमाणपत्र दिखाए। हालांकि, इनमें से किसी की भी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकी। पुलिस को कुल मिलाकर नौ आईडी कार्ड, नौ मोबाइल, 17 स्टांप मोहर, छह चेकबुक, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, 6 डेबिट कार्ड, तीन प्रकार के विजिटिंग कार्ड, चार इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इंवेस्टीगेशन ब्यूरो लिखे बोर्ड, 42,300 रुपये और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।

कहां-कहां तक फैले थे फर्जीवाड़े के तार?
इस मामले में पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कहा कि उनका दफ्तर ब्रिटेन में भी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले पश्चिम बंगाल में भी ऐसा ऑफिस चला चुके हैं। इनका क्राइम रिकॉर्ड भी पुलिस खंगाल रही है। संदिग्ध कार्यशैली को लेकर कमिश्नरेट पुलिस के साथ एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के चार बैंक खातों की जांच में जुटी है। पुलिस को अंदेशा है कि इन बैंक खातों को हवाला के जरिए धन का आदान-प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अलग-अलग धाराओं में धोखाधड़ी से लेकर जालसाजी और आईटी एक्ट के साथ-साथ प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 की धाराओं में केस दर्ज किया है।
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Author: ILMA NEWSINDIA

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