Shajapur News: तिरंगा यात्रा निकालकर शहीद को दी विदाई, आज होगा अंतिम संस्कार

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लेह-लद्दाख में तैनात सैनिक सुरेंद्र गुदारिया शहीद हो गए। जिस समय यह दुखद सूचना आई उनकी पत्नी अपने मायके में थीं। लोगों ने तिरंगा यात्रा निकालकर सम्मानपूर्वक विदाई दी।

Farewell given to the wife of the deceased soldier by organising a Tiranga Yatra

लेह-लद्दाख में तैनात सैनिक सुरेंद्र गुदारिया मंगलवार ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उनका अंतिम संस्कार आज गुरुवार को देवास जिले के हाटपिपल्या क्षेत्र के ग्राम बड़ियामांडू में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा। शहीद सुरेंद्र का विवाह पांच वर्ष पूर्व बेरछा निवासी अनिता बामनिया से हुआ था। वर्तमान में अनिता गर्भवती हैं और वे अपने मायके बेरछा में रह रही हैं । सेना के अधिकारियों ने उन्हें फोन पर यह दुखद समाचार दिया है। दंपती का एक चार वर्षीय पुत्र रुद्र भी है।पति के निधन की खबर सुनकर अनिता शोकाकुल हो गईं। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें जैसे-तैसे संभाला हुआ है।

बड़ी संख्या में गांव के लोग अनिता के मायके बेरछा पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया। शहीद को ग्रामीणों ने तिरंगा यात्रा के साथ विदाई दी। तिरंगा यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मंदिर चौराहे तक निकली, जहां श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यहां नगरवासियों ने नम आंखों से शहीद सुरेंद्र को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

गांव में शोक और राष्ट्रभक्ति का माहौल
शहीद सुरेंद्र के पैतृक गांव बड़ियामांडू में गम और गौरव का माहौल है। अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांववासी पार्थिव देह की अगवानी के लिए तैयार हैं और पूरा गांव सैनिक को अंतिम सलामी देने के लिए एकजुट है। हर ओर राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण है।

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Author: planetnewsindia

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।