
इन परियोजनाओं के पूरा होने से दिल्ली-एनसीआर और पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा आसान होगी, शहरों में ट्रैफिक जाम कम होगा, माल ढुलाई तेज होगी और औद्योगिक व आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी। अधिकांश परियोजनाएं 75 से 99 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी हैं और 2026-27 तक इनके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
करनाल रिंग रोड (एचएएम मोड): लागत 1,691.45 करोड़ रुपये। 34.5 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का करीब 96.42% काम पूरा हो गया है। इसके निर्माण का अंतिम लक्ष्य 31 अक्तूबर 2026 तय किया गया है। पहले यह कार्य 30 अगस्त 2025 तक पूरा होना था। इसके निर्माण से दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच आने-जाने वाले भारी वाहन बिना करनाल शहर में प्रवेश किए सीधे निकल सकेंगे। इससे करनाल को जाम से राहत मिलेगी। छह-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे लगभग 23 गांवों को सीधे मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा।
शामली-अंबाला (भाग-2, एनएच-344जीएम): करनाल, अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र से गुजरने वाली इस परियोजना पर 1,554.21 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। अब तक 81.50 फीसदी काम पूरा हो गया है। पहले यह मई 2025 में तैयार होना था जो अब 28 फरवरी 2027 तक तैयार होगा। 38 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन से हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और आसान बनाएगा। इसके पूरा होने के बाद अंबाला से शामली का सफर, जो अभी 3 से 4 घंटे में पूरा होता है, महज डेढ़ घंटे में तय किया जा सकेग।
शामली-अंबाला (भाग-3 एनएच 344जीएम): इस प्रोजेक्ट की लागत 1491 करोड़ रुपये है। अब तक यह 79.56 फीसदी बनकर तैयार हो गया है। करीब 37 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के निर्माण की अंतिम तारीख दिसंबर 2026 रखी गई है।
भिवानी-हांसी (एनएच-148 बी): हरियाणा में भिवानी और हांसी को जोड़ने वाला लगभग 43 किलोमीटर लंबा 4-लेन का नया हाईवे प्रोजेक्ट है, जिसकी कुल पूंजी लागत 1330.23 करोड़ रुपये है। इसका कार्य 99 फीसदी पूरा हो चुका है। पहले यह 16 दिसंबर 2025 को पूरा होना था। अब इस प्रोजेक्ट की नई डेडलाइन अगस्त 2026 रखी गई है। इससे आधा घंटे से 45 मिनट का समय बचेगा।
जगाधरी-ताजेवाला (एनएच-344, यमुनानगर): 32 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की लागत 1,269.5 करोड़ रुपये है। इसका निर्माण कार्य काफी धीमे चल रहा है। 2023 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो अब तक मात्र 65.90 फीसदी है तैयार हो सका है। अब इसकी नई लक्ष्य तारीख मार्च 2027 है।
निर्माण के अंतिम चरण में हैं ये हाईवे
अंबाला रिंग रोड (ग्रीनफील्ड): इस सड़क परियोजना की लागत 1,088.64 करोड़ रुपये है। 22 किमी लंबे रोड़ का निर्माण अब तक 90.32 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसे सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
जलबेहड़ा-शाहबाद (एनएच-152जी, कुरुक्षेत्र): इस परियोजना पर 927.22 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। 91.57 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसे अगस्त 2026 तक पूरा किया जाएगा।
इस्माइलाबाद-अंबाला (एनएच-152): इस सड़क के निर्माण पर 609.32 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अब तक 74.05 फीसदी काम पूरा हुआ है। इसे मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गुरुग्राम-जयपुर हाईवे पर छोटे काम: एनएच-48 के गुरुग्राम-कोटपुतली-जयपुर मार्ग पर तीन छोटे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें अतिरिक्त ढांचों का निर्माण (152.8 करोड़ रुपये, 35.68 फीसदी काम पूरा), सर्विस रोड का सुधार और रखरखाव (240.11 करोड़ रुपये, 56.05 फीसदी काम पूरा) और फुट ओवर ब्रिज का निर्माण (14.2 करोड़ रुपये, 97.2 फीसदी काम पूरा) शामिल हैं।
रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास कब तक होंगे तैयार
रोहतक के मेहम-बेरी रोड पर वाहन अंडरपास: लागत 50.25 करोड़ रुपये, 85 फीसदी काम पूरा।
पंचकूला (अंबाला के पास) में रेलवे ओवरब्रिज: लागत 19.51 करोड़ रुपये, 85 फीसदी काम पूरा।
भिवानी के सिवानी में रेलवे ओवरब्रिज और एप्रोच रोड: दो परियोजनाएं चल रही हैं। पहली पर 43.34 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं और 90 फीसदी काम पूरा है। दूसरी की लागत 6.13 करोड़ रुपये है, जिसमें 5 फीसदी काम हुआ है।
भिवानी बाईपास पर 6 लेन वाहन अंडरपास: लागत 54.65 करोड़ रुपये है। अभी काम शुरुआती चरण में है।
छह वर्षों में हरियाणा को राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए मिला हजारों करोड़ का बजट
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के निर्माण और रखरखाव के लिए पिछले छह वर्षों में लगातार हजारों करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।