भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यूं तो कई सुपरस्टार हुए हैं, लेकिन मुंबई की बोरिवली के इस बिंदास क्रिकेटर ने अपनी अलग छाप छोड़ी है। ‘गार्डेन में कोई नहीं घूमेगा’ से लेकर डीआरएस विफल होने पर कुलदीप का मजाक उड़ाने तक रोहित ने फील्ड पर सभी का दिल जीता।

रोहित शर्मा ने टेस्ट से संन्यास ले लिया है। बुधवार को एक इंस्टग्राम पर स्टोरी के जरिये हिटमैन ने सबसे लंब प्रारूप से संन्यास की घोषणा की। भले ही रोहित ने टेस्ट में ज्यादा मुकाबले न खेले हों, लेकिन उनकी बल्लेबाजी कौशल हमेशा से अद्वितीय रही। बरसों पहले भारत की अंडर 17 टीम में सलामी बल्लेबाज रविचंद्रन अश्विन और स्पिन हरफनमौला रोहित शर्मा हुआ करताे थे। अंडर 19 ट्रायल के लिए आते समय एक बार रोहित का किटबैग मुंबई की लोकल ट्रेन में छूट गया और दिलीप वेंगसरकर जैसे अनुशासनप्रिय व्यक्ति ने भी उनकी प्रतिभा को देखते हुए इस गलती को माफ कर दिया था।
विराट कोहली भी चौंक गए थे
एक बार विराट कोहली ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हम सभी हैरान थे कि ऐसा कौन सा क्रिकेटर आ रहा है कि कोई हमारा नाम ही नहीं ले रहा, लेकिन जब उन्हें बल्लेबाजी करते देखा तब समझ में आया। उन्होंने यह भी कहा था कि हर स्ट्रोक के लिए रोहित के पास डेढ सेकंड अतिरिक्त होता है। लाल गेंद और रोहित का रिश्ता खट्टा मीठा रहा, लेकिन सफेद गेंद में उनकी बादशाहत हमेशा रही जिसमें उन्होंने 50 ओवरों के विश्व कप में सात शतक जड़े।
आलोचक यह कह सकते हैं कि 75 से भी कम मैच खेलने वाले रोहित का टेस्ट कैरियर औसत ही रहा जिसमें वह SENA ( दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया) देशों के खिलाफ एक ही शतक जड़ पाए, लेकिन फैंस के लिए उनके बल्ले का जादू कुछ अलग ही था। अपनी कलाई के जादू से सफेद गेंद को स्टेडियम के चारों ओर पीटने वाले रोहित शर्मा, अक्सर स्टम्प माइक पर अनजाने में ‘वनलाइनर’ छोड़कर मुस्कुराहटें बिखेरने वाले रोहित शर्मा या फिर सुपरस्टार होने के बावजूद अपने करीब से लगने वाले रोहित शर्मा।
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यूं तो कई सुपरस्टार हुए हैं, लेकिन मुंबई की बोरिवली के इस बिंदास क्रिकेटर ने अपनी अलग छाप छोड़ी है। ‘गार्डेन में कोई नहीं घूमेगा’ से लेकर डीआरएस विफल होने पर कुलदीप का मजाक उड़ाने तक रोहित ने फील्ड पर सभी का दिल जीता। उनके संन्यास से एक अध्याय का अंत हो गया। विराट कोहली के इस दौर में रोहित ने भी अपने एक दशक से अधिक के टेस्ट क्रिकेट के सफर में अपने लिए अलग जगह बनाई। उनके बल्ले से निकले बेहतरीन पूल शॉट्स और किसी खिलाड़ी की गलती पर उनकी मुस्कान हर क्रिकेटप्रेमी के दिल में बसी रहेंगी।
वनडे में तीन दोहरे शतक ने उन्हें सबसे अलग बनाया। यही वजह है कि टेस्ट में भी फैंस को उनसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उम्र के साथ-साथ एक दो सीरीज में खराब प्रदर्शन से वह कई बार फैंस के निशाने पर भी रहे। उनकी संन्यास की बातें हुईं और आखिरकार उन्हें क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप को अलविदा कह दिया है। उन्होंने भले ही 67 टेस्ट ही खेले, लेकिन वनडे में 273 मैच खेल चुके हैं। उनकी कप्तानी में हमेशा टीम भावना नजर आई जो उन्हें रिकॉर्ड के मामले में महेंद्र सिंह धोनी के बाद दूसरा सबसे सफल कप्तान बनाती है।
Author: planetnewsindia
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