दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है मातृ शक्ति इसके आगे सारी दुनिया नतमस्तक होती है। इस समय हिंदुओं का पवित्र त्यौहार नवदुर्गा हर वर्ग समुदाय के लोगों द्वारा श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। मां बेटे का इस जग में बड़ा ही सुंदर नाता माना गया है। कोई भी व्यक्ति मां के आशीर्वाद के बिना किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकता। वह सबसे बड़ा भाग्यशाली है जिसके सर पर मां का साया है। अगर कोई भगवान को प्रसन्न करना चाहता है और उसकी कृपा पाना चाहता है तो उसे परमपिता परमेश्वर से पहले मातृशक्ति की आराधना करना बहुत जरूरी है।
यह कहना है नगर में निवास कर रहे साहित्यानंद संस्था के संस्थापक 85 वर्षीय बुजुर्ग कवि एवं साहित्यकार पंडित रामनिवास उपाध्याय का। जिनकी माता रानी में अटूट श्रद्धा है वे कहते हैं उन्हें देवी के स्वरूप में अपनी मां के दर्शन होते हैं क्योंकि वे अपनी मां की आज्ञा का पालन आज तक करते आ रहे हैं। वे बताते हैं उम्र के आखिरी पड़ाव पर जब उनकी माता श्री अस्वस्थ रहने लगीं तब उन्होंने अपने पुत्र रामनिवास को बुलाया और कहा मैं अभी तक अपनी सामर्थ्य के अनुसार जितना मुझ से बन सका नवदुर्गा का यह पर्व पूरी श्रद्धा भक्ति व व्रत केसाथ देवी मां की सेवा करते हुए मानाती आई हूं । लेकिन अब मेरा स्वास्थ्य अच्छा न होने के कारण मेरे शरीर में शिथिलता आ गई है। मेरी चिंता यह है कि मेरे बाद मेरी परंपरा को आगे कौन निभाएगा इतना सुनते ही रामनिवास ने उन्हें विश्वास दिलाया और कहा तुम्हारा अधूरा छोड़ा हुआ यह कार्य मैं जीवन पर्यंत करूंगा तब से लेकर आज तक 65 वर्ष पूरे हो चुके हैं और वे प्रतिवर्ष नवरात्रि में नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं हवन पूरे विधि विधान के साथ करते हैं । और इस तरह वे व्रत रखने के साथ साथ माता रानी के दर्शन करके पुण्य लाभ ले रहे हैं। उनका कहना है कि वह जीवन भर इसी तरह मां को दिये वचन को पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ निभाएंगे। किसी ने ठीक ही कहा है मां का लाडला हो तो ऐसा।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS